ट्रेन में सैक्सी फिगर वाली भाभी की चुदाई

बात कुछ दिनों पहले की है। मै ट्रेन से मुंबई जा रहा था। मैंने स्लीपर क्लास में टिकट बुक किया था, चूंकि मेरा टिकट आरएसी था इसलिए मुझे सिर्फ आधी सीट मिली। बाकी की आधी सीट एक भाभी को जो अकेले सफर कर रही थी उनकी मिली।

सफर काफी लंबा था। यह सफर पूरे 30 घंटे का था। नवंबर को महीना था तो थोड़ी ठंड भी थी। लेकिन मै घर से कम्बल वगेरह लेकर ही निकला था।

जब वो भाभी ट्रेन में चढ़ी और अपनी सीट खोजते हुए मेरे पास आई तो मैंने बताया कि उनकी भी सीट यहीं है।

भाभी को देखकर तो मेरा मन जैसे मचल गया। उसके बड़े बड़े बूब्स, बड़ी सी गान्ड और चिकनी कमर कसम से कमाल लग रही थी। मेरा लन्ड तन कर पूरा खड़ा हो गया था। लेकिन मै कैसे भी शांति से बैठा रहा।

वो हल्का सा मुस्कुराई और मेरे साथ बैठ गई। हम आमने सामने ही बैठे थे। फिर हमारी बातें चालू हो गई। बातों में पता चला कि उनको भी मुंबई ही जाना है।

क्योंकि मुंबई में उनके पति रहते है। उसने मुझे बताया कि उसका पति उससे अलग रहता है और 3 सालों से मिलने तक नहीं आया। उसकी बातें सुन कर पहले तो मुझे बहुत तरस आया।

लेकिन थोड़ी देर बाद वो थोड़ा खुल गई और मेरी जांघ पर अपना हाथ रख दिया। मै बिल्कुल कांप गया। फिर वो धीरे-धीरे मेरी जांघों को सहलाने लगी। मै उसकी मंशा समझ गया और उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया।

शाम के 6 बज चुके थे और अंधेरा भी ही गया था। मै अपना कम्बल निकालने ही वाला था कि उस भाभी ने बोला कि उसके पास बड़ी वाली रजाई है जिसमें वो दोनो फिट आ जाएंगे ओर मुझे कम्बल निकालने से मना कर दिया क्योंकि फिर रजाई और कम्बल एक साथ रखने ओर जगह काम पड़ जाती।

अब हम एक साथ रजाई के अंदर सटकर बैठ गए। अब वो धीरे-धीरे मेरे जांघों पर हाथ फेरने लगी और मुझसे पूछा कि क्या तुम्हे अच्छा लग रहा है।

मै हाँ में सर हिला दिया। वो बोली, “आगे ओर भी करूं क्या।”
मेरी तो खुशी के ठिकाने ही ना रहे। उसने मेरी पैंट की ज़िप खोली और मेरे तने हुए लंड को बाहर निकाला। अब वह उसे हिलाने लगी। वो यह सब बड़े आराम से के रही थी ताकि किसी को पता ना चले।

मैंने भी मजे लेने शुरू कर दिए। मैंने अपने हाथ उसके बूब्स पर रख दिए। ओर उन्हें दबाने लगा। थोड़ी देर दबाने के बाद हम दोनों लेट गए और रजाई ओढ़ ली।

हम दोनों एक दूसरे की उलटी दिशा में लेते हुए थे। उसकी टांगे मेरी तरफ थी और मेरी उसकी तरफ। तब मैंने अपनी एक टांग को उसकी सारी के अंदर से घुसाते हुए उसकी चुत पर रख इया और उसे प्यार से मसलने लगा।

वो सिसकियां भरने लगी। लेकिन कैसे भी करके उसने अपने आप को काबू में रखा। पवो भी अपने पैरों से मेरे लन्ड को हिला रही थी। फिर मैंने उससे धीरे से पूछा कि बाथरूम में चलोगी।

वो मान गई। रात के 12 बज रहें थे। ठंडी में सब रजाई ओढ़ कर सो रहे थे। लेकिन हम दोनों को तो गर्मी चढ़ी हुई थी। हम दोनों चुपके से पश्चिमी स्टाइल वाले टॉयलेट में घुस गए।

घुसते ही मैंने दरवाजा लॉक किया और उसे चूमने लगा। वो भी मुझे पागलों की तरह चूमने लगी। थोड़ी देर बाद उसकी ब्लाउस और ब्रा मैंने उतार दी और उसकी चूचियों को मुंह में भर लिया।

फिर मैंने अपना लन्ड उसके मुंह में डाल दिया और उसके गले तक पूरा लन्ड अन्दर धकेल दिया। वो भी लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। अब मेरा लंड एकदम अकड़ के चुत में घुसने के लिए तैयार था।

अब मैंने उसे टॉयलेट सीट पर हाथ रख कर घोड़ी बना दिया और उसे पीछे से चोदने लगा। पहले तो धीरे धीरे झटके दे रहा था लेकिन अब मैंने तेज के दिए और उसकी भी सांसें तेज हो गई थी। में उसे करीब 10 मिनट तक चोदता रहा तो वो झड़ गई और फिर मैंने उससे कहा कि मेरा माल निकलने वाला है तुम घूम जाओ।

वो घूम गई और उसने मेरा लंड अपने मुंह में डाल लिया और चूसने लगी। मैंने सारा माल उसके मुंह पर निकाल दिया। अब वह उसे चाटने लगी।

अब हमने एक और बार करने की सोची। इस बार मैंने उसे वाश बेसिन के साथ लगाकर खड़ा कर दिया और उसकी एक टांग उठा कर उसे चोदने लगा। मै काफी ज़ोर से उसे झटके दे रहा था। वो भी मजे में मेरे पीठ को अपने नाखूनों से खरोच रही थी।

फिर मैं टॉयलेट सीट पर बैठा और वो मेरे लन्ड पर बैठ कर उछलने लगी। मैंने भी उसके बूब्स को अपने मूंह में डाल लिया और चूसने लगा।थो

ड़ी देर बाद मैंने उससे पूछा कि माल चुत में छोङू या बाहर। उसने कहा अंदर ही दाल दो सब कुछ। उसके इतना कहते ही मैंने अपना माल उसके अंदर ही छोड़ दिया।

उसके चुत के अंदर जैसे बहुत गर्म कोई चीज डाल दी गई हो उसे ऐसा महसूस हुआ। उसने मुझे कहा कि बड़े दिनों के बाद ऐसी संतुष्टि मिली है। फिर हमने अपने कपड़े पहने और उसने अपना मुंह धोया। फिर हम अपनी सीट पर आकर बैठ गए।

फिर हम दोनों सो गए। अगली सुबह मैंने उससे उसका नंबर और पता के लिया और हम मुंबई पहुंच गए। उसने अपने पति से मुलाकात की और दोनों ने 6 महीने बाद घर वापिस जाने का फैसला के लिया।

अब भी जब मुझे काम से फुर्सत मिलती है तो मैं भाभी के मजे लेने के लिए निकल पड़ता हूं। भाभी तो अब ओर भी हॉट और सेक्सी हो गई है।

उसने सेक्स ने नए नए तरीके सीख लिए है और विदेशियों जैसे तरह तरह कि पोजिशन में सेक्स करती है। अब वो आंख पर पट्टी बांधकर और हाथों में हथकड़ियां लगाकर सेक्स करने को बेचैन रहती है।

उसने मुझे बताया कि उसका पति उसे संतुष्ट नहीं कर पाता लेकिन मुझसे वो बहुत खुश है। कल वो गांव वापिस जा रही है। जो भी हो वो ट्रेन की की यात्रा में कभी नहीं भूल सकता जिसमें मुझे ऐसे मजे मिले हो। मै उस भाभी को याद जरूर करूंगा।