स्कूल के पहले प्यार की सालों बाद चुदाई

हेलो दोस्तो, मेरा नाम संतोष है और मैं गुडगांव में रहता हूं। मैं यहां एक कंपनी में जॉब करता हूं और यही किराए पर एक फ्लैट में रहता हूं। मुझे गुडगांव है 2 साल हो चुके हैं और यहां मेरा मन लग गया है। जहां उस तरफ खूबसूरत में जा रहे हैं और बहुत सुंदर सुंदर लड़कियां यहां रहती हैं।

एक दिन मुझे पता लगा कि कंपनी में मेरी टीम में एक लड़की ज्वाइन कर रही है वह उसी दिन जब मैं घर गया तो मकान मालिक ने बताया कि तुम्हारे फ्लैट के साथ वाले रूम में एक लड़की रहने के लिए आई है। मेरे मन में उस लड़की से मिलने की जिज्ञासा पैदा हुई लेकिन मैंने काम की वजह से सोचा इससे कल मिल लेंगे।

अगले दिन जब मैं ऑफिस पहुंचा तो जो लड़की नहीं नहीं ज्वाइन हुई थी वह आकर अपनी टेबल पर रखी हुई थी। जो मैंने उसकी तरफ देखा तो मुझे उसकी शक्ल कुछ जानी पहचानी सी लगी। मुझे याद नहीं आ रहा था कि मैंने उसे कहा देखा है लेकिन मुझे पक्का पता है ताकि मैं उसे जानता जरूर है।

फिर वह लड़की मेरी तरफ देख कर उठी और मुस्कुराते हुए मुझे हाय बोला। मैंने भी मुस्कुराते हुए उसे हेलो कहा और उससे अपना नाम बताया। फिर उसने मुझसे कहा तुमने मुझे पहचाना नहीं।

उसके पास सुनते ही अब तो पक्का हो गया था कि मैंने उसे कहीं तो देखा है फिर मेरी नजर उसके गले के तिल पर पड़ी और अचानक मुझे याद आया कि यह तो भावना है, हम दोनों ने नर्सरी से दसवीं तक एक ही स्कूल में पढ़ाई की थी और हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। दसवीं के बाद हम दोनों ने अलग-अलग कॉलेज में एडमिशन ले लिया होगा इस तरह हमारा मिलना एक दूसरे से धीरे धीरे बंद हो गया।

फिर फिल्मों ने कहा तुम भावना हो ना। उसने उसने मुझसे कहा तुमने तो बड़ा टाइम लगा दिया मुझे पहचानने में। याद है जब हम साथ में पढ़ते थे तो सारा टाइम साथ में ही बिताते थे और तुम मेरी टिफन का सारा खाना खा जाते थे।

फिर हम दोनों मैं थोड़ी देर बातें करने के बाद अपना अपना काम किया और जब शाम को हम दोनों घर जाने लगे तो मैंने उससे पूछा कि तुम कहां रहती हो। उसने कहा मैं कल ही एक नए किराए के घर में शिफ्ट हुए हूं। जब उसने मुझे एड्रेस बताया तो मुझे पता लग गया कि मेरे साथ वाले फ्लैट में जो लड़की सिर्फ हुई है वह भावना ही है।

फिर मैंने उसे कहा तुम्हारे साथ वाले फ्लैट में मैं रहता हूं। उसने कहा अरे वाह यह तो बहुत अच्छी बात है अब तो मैं भी तुम्हारे साथ थी कंपनी आऊंगी और जाया करूंगी। मैंने भी मुस्कुराते हुए कह दिया हां हां क्यों नहीं। फिर हम दोनों मेरी बाइक पर बैठकर अपने घर की तरफ चल दिए।

इस तरह जब हम घर पहुंचे तो वो मुझे अपने कमरे में ले गई और वहां जाकर हमने अपने बचपन की बातें शुरू कर दी। उसने मुझे याद दिलाया कि कैसे मैंने दसवीं क्लास में उसे एक बार प्रपोज किया था। फिर मैंने से शरमाते हुए कहा अरे उस समय मुझे इतनी समझ कहां थी। इस तरह कई दिन बीत गए और हमारी आपस नज़दीकियां बहुत ज्यादा बढ़ गई।

एक बार हमारी कंपनी के ग्रुप का जॉइंट डिनर था और मैं और भावना भी उसे डिनर में शामिल थे। उस दिन डिनर के बाद हम लोग पब में चले गए और वहां जाकर बहुत ज्यादा दारु पी ली। मैं तो थोड़े होश नहीं था लेकिन भावना ने बहुत ज्यादा पी रखी थी।

उसके बाद हम घर पहुंचे तो भावना बोले आज मैं तुम्हारे यहां ही रुक जाऊं। तो मैंने कहा क्यों नहीं उसे अंदर बुला लिया। अंदर जाते ही जैसे विभिन्न सोफे पर बैठे तो वह मेरी तरफ दुखी मिलेगी वह बिना अपनी पलक झपकाए लगातार मेरी तरफ देखे ही जा रही थी।

जैसे ही मैं उसे कुछ बोलने के लिए उसकी तरफ घुमा उसने मेरे गाल पकड़े और मुझे होठों पर किस करना शुरू कर दिया। मैंने उसे धक्का देकर पीछे कर दिया क्योंकि मैंने सोचा यह नशे में है इसलिए ऐसा कर रही है। लेकिन वह दोबारा मुझे चूमने लगा रहा नहीं गया और मैं भी उसे बेतहाशा चूमने लगा।

फिर धीरे-धीरे मैंने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और उसकी चूचियां दबाने लगा और दूसरे हाथ से उसकी गांड मसलने लगा। मैंने उसे सोफे पर से उठाया और बेडरूम में ले जाकर बेड पर लिटा कर उसके ऊपर चढ़कर उसे चूमने लगा।

अब मैं उसकी सूचियों को उसके कपड़ों के ऊपर से चूस रहा था। अब तो भावना सिसकियां ले रही थी और पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी।

इसी बात का फायदा उठाते हुए मैंने उसके कपड़े उतार दिए और उसने नीचे सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी। मैंने उसकी ब्रा का हुक खोला और उसे तरफ रख दिया।

अब मैं उसकी चुचियों पर टूट पड़े और एक एक कर कर दोनों चुचियों को चूससे लगा। अब भावना सिसकारियां भर रही थी।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था इसीलिए मैंने उसकी पैंटी भी उतार कर एक तरफ फेंक दी है और उसे चूमने लगा।

मैंने अपना लन्ड उसकी चुत पर रखा और एक झटका दिया लेकिन मेरा दिल फिसल कर दूसरी तरफ चला गया। लेकिन फिर मैंने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसकी फोटो पर रखा और एक झटका दिया।

मेरे लन्ड का सुपारा उसकी चुत में घुस गया था। मैंने धीरे धीरे झटके देते हुए पूरा लंड उसकी चुत में घुसा दिया। भावना हल्की हल्की सिसकारियां भरने लगी थी।

अब मैंने धक्के लगाने शुरु कर दिया और भावना भी वासना में लिए होकर आअहहह…. हमम.. जैसी आवाज़ें निकालने लगी। थोड़ी देर में मैं उसे तेजी से चोदने लगा हुआ वह भी मेरे पीठ पर अपने हाथ फेर रही थी।

करीब 10 मिनट तक उसे चोदने के बाद मैंने सारा माल उसके पेट पर ही निकाल दिया और थक कर उसके ऊपर ही लेट गया।

भावना भी मुझे सहलाने लगी और प्यार करने लगी। फिर हम दोनों नंगे ही एक दूसरे के साथ लिपट कर सो गए। अब हम दोनों एक साथ ही ऑफिस जाते हैं वह साथ में ही वापस आते हैं।

जब भी मेरा मन होता है तो मैं उसे सेक्स के लिए अपने घर बुला लेता हूं और कभी कभी वह भी मुझे अपने कमरे में सेक्स करने के लिए बुला देती है।