दिसंबर की सर्दी में कोमल के कोमल बूब्स और चुत – 2

हेलो दोस्तों, मेरी इस कहानी के दूसरे भाग में आपका स्वागत है। उम्मीद करता हूं कि आपको इसका पहला भाग पसंद आया होगा। तो चलिए बिना किसी देरी के जहां पिछली कहानी खत्म हुई थी वहां से शुरू करते हैं……

कोमल नाराज होकर वहां से जा चुकी थी और मैं अपने हाल पर रो रहा था। फिर मेरे फोन की घंटी बजी और मुझे बोला गया कि जल्दी आओ। अब मैं कुछ और कर भी नहीं सकता था इसलिए मैं मैदान की तरफ चला गया और मैच शुरू हो गया।

मेरे दिमाग में बस जो हुआ था वही घूम रहा था इसलिए मैं मैच पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहा था। उस दिन मैं कुछ ज्यादा रन भी नहीं बना पाया और मेरे से दो कैच भी छूट गए। टीम के सभी खिलाड़ी मेरे से बहुत निराश थे।

हालांकि मुझसे किसी ने कुछ कहा नहीं लेकिन मैं बढ़िया खिलाड़ियों में से एक था और मेरा इस तरह खेलना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण था। वह मैं आज छम हार चुके थे लेकिन अभी हमारे पास और भी मौके थे।

मैच खत्म होने के बाद मैंने कमल को फोन किया और उसे सॉरी बोला। वह बोली मैंने तुम्हें कहा था कि हम गलत जगह और गलत टाइम पर यह चीजें कर रहे हैं लेकिन तुम नहीं माने बहुत सारा मूड खराब करके रख दिया।

मैंने उससे कहा अरे मुझे क्या पता था कि ऐसा होने वाला है। लेकिन वह नहीं मानी और उसने फोन काट दिया। अब वह मेरा फोन भी नहीं उठा रही थी और मुझसे बहुत नाराज थी। दो चार दिन तक उसने मेरा फोन नहीं उठाया।

मैंने भी सोच लिया था कि इसका बदला तो मैं बहुत अच्छे से लूंगा। फिर उसका अगले दिन फोन आया और मैंने उससे कहा कि अब क्यों किया है फोन। वह बोली तुमने हरकत ही ऐसी की थी। लेकिन अब मेरा गुस्सा शांत हो गया है और मैं तुमसे मिलना चाहती हूं।

मुझे पता था कि अगर मैं खाली हाथ गया तो पक्का फिर मुझे बलि का बकरा बना देगी इसलिए मैं उसके लिए सुंदर सा गिफ्ट लेकर गया। तो गिफ्ट देखकर बहुत खुश हुई और उसने मुझे गले लगा लिया।

10 दिनों के बाद आज हमारी सुलह हो गई थी। हम अभी फिर से बातें शुरू हो गई। मेरी खेल में भी सुधार हुआ और अब हम लगातार में जीते ही जा रहे थे। हमने सेमी फाइनल जीत लिया था और अब हमारा फाइनल मैच पांच दिनों बाद था।

मैंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था और कोमल ने मेरी तारीफ करते हुए कहा कि तुम तो विराट कोहली को भी फेल करते हो। मौके को भागते हुए मैंने उससे कहा कि मैंने एक जगह देख रखी है क्या तुम चलोगी तुम्हारे लिए सरप्राइज है।

वह मेरे सारे को समझ गई और उसने हां कह दिया। अब कॉलेज के लड़कों से अच्छी जान पहचान हो गई थी और मेरे एक दोस्त का कमरा खाली था तो मैंने उसे कहा कि कल मैं इसका इस्तेमाल करूंगा। वह मेरी तरफ शरारती निगाहों से देखने लगा। वो बोला – जा ऐश कर।

फिर मैं अगले दिन कोमल को उसी कमरे पर ले गया और हम दोनों अंदर जाकर बेड पर बैठ गए। फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसे कडल करने लगा। फिर हम दोनों ने अपने-अपने स्वेटर और जैकेट उतार दिए और एक दूसरे की और बढे।

सर्दियों के दिन थे लेकिन कोमल का गोरा बदन देखकर मेरी सारी सर्दी दूर हो चुकी थी और मैंने उसके गोल गोल बूब्स पर अपना हाथ रख दिया और फिर उसकी पैंटी और ब्रा भी उतार दी।

अभी पूरा नंगा हो गया था और अब हमने एक दूसरे को किस करना शुरू किया लेकिन मुझसे आज ज्यादा इंतजार नहीं हो रहा था इसलिए मैंने सीधा उसके बूब्स पर अपने होंठ रख दिए और उसकी गरम गरम बूब्स को चूसने लगा।

वो अम्ह्हह… ओह्ह्ह…करके सिसकियां भरने लगी।

मैं बीच बीच में अपने दांतों से उसकी मुलायम को काट रहा था। उसके नरम नरम बूब्स पर दांतों के निशान पड़ गए फिर मैंने उसकी चुचियों का रुख किया और उन्हें जोर से दबा कर चूसने लगा।

वह बोली पंकज आराम से चूसो। जितना मन चाहे उतना चूसो लेकिन अपने दांत मत काटो, दर्द होता है। मेरा बस चलता तो मैं उसकी चूंचियां खा ही जाता। अब मैंने अपना लौड़ा उसके हाथ में थमा आया और बोला अब तुम भी इसे अपने दांतो से काटो और अच्छी तरह से चूसो।

उसने तुरंत ही मेरा लंड हाथ में ले लिया और हिलाने लगी। मैं बगल में लेट गया और वो मेरे पास बैठ गयी थी। मैंने सर के नीचे तकिया रखा और कोमल को देखने लगा। मेरा लंड 8 इंच का और 3 इंच मोटा था।

फिर धीरे धीरे वो उपर नीचे हाथ चलाकर लंड को हिलाने लगी। मुझे मजा आ रहा था। मैंने उसके बूब्स को हाथ में लेकर सहलाने लगा। कुछ देर बाद अलका मेरे लौड़े पर झुक गयी और पूरा का पूरा मुंह में ले गयी और मेरा लंड चूसने लगी।

आह.. ओहो… जैसी मैं आवाजे निकालने लगा। कुछ देर बाद तो अलका किसी रंडी की तरह मेरा लंड चूसने लगी।

मैंने उसकी गांड को थपथपाते हुए कहा कि शाबाश शाबाश ऐसे ही करो। कोमल अब तेजी से मेरा लन्ड चूस रही थी और उसके गुलाबी होंठ अब लाल पड़ गए थे।

मुझे जन्नत जैसा आनंद मिल रहा था और मैं उसकी चुचियों पर उंगलियां फर रहा था। अलका तेज तेज अपने सिर को उपर नीचे करके मेरा मोटा लंड चूस रही थी।

मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसके रसीले और गुलाबी होठ मेरे लंड को चूस रहे थे। मैं जन्नत में पहुच गया था। उस पर सेक्स का खुमार चढ़ चुका था और अब वह भी मेरे लन्ड को अपने दांत से बीच बीच में काट रही थी।

फिर मैं उसकी चूत की तरफ बढ़ा और उसकी चिकनी चुत पर अपनी जीभ रख दी और उसे चाटने लगा। फिर मैं उसकी चूत में उंगली करने लगा।

वह तड़पने लगी और उसका बदन मचलने लगा। अब उससे इंतजार नहीं हो रहा था और वह मुझसे जल्दी चुदवाना चाहती थी।

मैं उसकी भावना समझ गया और उन्होंने अपने लन्ड पर थूक लगाया और उसकी चुत पर लंड को रखते हुए हल्का सा झटका दिया। वो उछल पड़ी।

लड़कियों फिर मैंने अपने लन्ड को थोड़ा सा पीछे किया और इस बार एक जोर का झटका देते हुए पूरा लंड उसकी चुत में घुसा दिया।

अब मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे तेजी से पेलने लगा। वो ऊहह….. सी सी सी…. अहम्म… अह्हह.. अई… अई करके मोन करने लगी।

कोमल रंडियों की तरह जोर जोर से चिल्लाने लगी। उसकी चीखे मुझे उसको और जोर से पेलने को मजबूत कर रही थी। अब हम दोनों एक दूसरे की आंखों में आंखें डाल कर सेक्स कर रहे थे और बीच-बीच में किसी भी कर रहे थे।

कोमल तो बीच में एक बार झड़ भी चुकी थी और अब वह दूसरी बार झड़ने वाली थी।

मैं भी अब झड़ने वाला था इसलिए मैंने कोमल के बूब्स को कस के पकड़ा और जोर का झटका देते हुए सारा माल उसकी चुत के अंदर ही निकाल दिया।

उसकी चुत से मेरा सफेद माल बहने लगा और मैं उसके ऊपर ही लेट गया।

थोड़ी देर आराम करने के बाद हमने अपने कपड़े पहने और मैं उसको उसके घर छोड़ आया। अगले दिन मैंने मैच में खूब रन बनाए और हमने फाइनल जीत लिया।

इस कहानी का पहला भाग – दिसंबर की सर्दी में कोमल के कोमल बूब्स और चुत – 1