प्यासी चाची को किया संतुष्ट

हेलो दोस्तों हाजिर हूं मैं आज फिर आपके लिए एक नई कहानी लेकर। उम्मीद करता है कि आपको यह कहानी पसंद आएगी। तो चलिए कहानी शुरू करते हैं, मेरा नाम राज है और मैं दिल्ली में रहता हूं।

हमारे परिवार में चार लोग हैं और मेरे चाचा का परिवार भी दिल्ली में ही रहते हैं लेकिन वह हमारे घर से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर रहते हैं। हम उनके घर कभी कभी मिलने चले जाते हैं। लेकिन हमारा उनके साथ इतना ज्यादा खास लगाव नहीं है और उनका भी हमारे साथ कुछ खास लगाव नहीं है।

मेरे चाचा की शादी को 15 साल हो गए हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। मेरी चाची दिखने में अभी भी ठीक-ठाक लगती है और उनके बूब्स तो बहुत ही बड़े बड़े हैं। उनको देखकर तो कभी-कभी मेरा लन्ड ही खड़ा हो ही जाता है।

एक दिन मैं अपने चाचा के घर गया तो चाचा घर पर नहीं थे और उनके दोनों बच्चे स्कूल गए हुए थे। चाची घर पर अकेली थी और एक कमरे में उदास बैठी हुई थी। मैंने उनसे पूछा चाची क्या बात है आप इतनी उदास क्यों दिख रही है। उन्होंने कहा बस ऐसे ही तुम्हारे चाचा में अब वह बात नहीं रही।

मैंने बोला चाची क्या समस्या है मुझे बताइए मैं कोई ना कोई हल ढूंढ दूंगा। फिर उन्होंने कहा नहीं तुम यह नहीं सुलझा पाओगे। मैंने चाची से कहा आप मुझे बताइए तो सही क्या बात है मैं आपकी बातें समझ नहीं पा रहा हूं।

फिर चाची ने बात बदल दी और उन्होंने पूछा तुम्हारे घर वाले सभी ठीक-ठाक है ना। तुम आज बहुत दिनों के बाद मिलने आए हो। पहले तो हफ्ते, पंद्रह दिन में दो तीन बार आ जाया करते थे लेकिन अब क्या हुआ तुम तो अब हमसे मिलने भी नहीं आते। मैंने उनसे कहा अरे सर जी अभी थोड़ा मैं कॉलेज में पढ़ाई को लेकर बिजी हूं इसलिए मिलने नहीं आ पाता।

आप ही कभी हमसे मिलने हमारे घर आ जाया करो। उन्होंने कहा जरूर बेटा कभी समय मिलेगा तो तुम्हारे घर भी मिलने आऊंगी बहुत दिन भी हो गए हैं तुम्हारे घर आए। इस तरह मैंने चाची से काफी देर बातें की और उन्होंने मेरे लिए दोपहर का खाना बनाया।

इतनी देर में उनके दोनों बच्चे भी स्कूल से आ गए और हम सभी ने साथ में बैठकर खाना खाया। खाना खाने के बाद में अपने घर की तरफ चल पड़ा। लेकिन भाभी की बातें अब मेरे दिमाग में घूम रही थी। मैं समझ चुका था कि शायद चाची पक्का चाचा से संतुष्ट नहीं हो पा रही होगी इसीलिए मुझसे ऐसी बातें कर रही थी।

फिर क्या था मैं चाची की पूरी कहानी सुनना चाहता था इसलिए मैं पांच दिन के बाद फिर से उनके घर चला गया और वह घर पर अकेली ही थी। मैंने फिर चाची को उदास बैठे देखा तो मैंने फिर चाची से पूछा चाची क्या बात है आप मुझे बता क्यों नहीं रही। आपको क्या समस्या है मुझे बताओ तो सही।

उन्होंने फिर कहा तुम यह समस्या नहीं सुलझा पाओगे। मेरे बहुत ज्यादा जोर देने पर आखिर चाची ने हार मान ही ली और चाची ने मुझसे कहा कि मैं शारीरिक संबंधों के बारे में बात कर रही हूं और तुम इसमें कुछ भी नहीं कर सकते। मैं उनकी बात सुनकर चुप हो गया। फिर थोड़ी देर बाद में बोला चाची मैं आपकी समस्या सुलझा तो सकता हूं लेकिन यह गलत काम होगा।

फिर चाची बोली गलत या सही इसका निर्णय मैं करूंगी तुम सिर्फ मेरी समस्या सुलझाओ। फिर मैंने चाची को बोलना ठीक है मैं आपका साथ देने को तैयार हूं।

मेरे इतना कहते ही उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और उनका स्पर्श पाते ही मेरा लन्ड खड़ा हो गया और मैंने भी उनको कस के पकड़ लिया। फिर वह मुझे चूमने लगी। अब चाची ने मुझे बेड पर धक्का दे दिया और मेरे होठों को जोर जोर से चूमने लगी और मैं भी उनके होठों का रस पीने लगा।

फिर मैंने अपनी जीभ चाची के मुंह में डाल दी और वह मेरे जीभ को चूसने लगी। यह वाकई में बहुत ही अद्भुत नजारा था।

फिर मैंने चाची के बूब्स पर अपना हाथ रख दिया और उन्हें बड़े ही प्यार से दबाने लगा। इस तरह हम करीब तीन चार मिनट तक किस करते रहे और फिर चाची ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

चाची ने साड़ी पहन रखी थी और मैंने उनकी सारी खींच कर उतार दी अब वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी और उनकी नाभि देखकर मेरा मन मचलने लगा और मैं उनकी नाभि में अपनी जीभ घुसा कर उसे चाटने लगा।

फिर मैंने उनके ब्लाउज और पेटीकोट के साथ पैंटी भी उतार दी और उन्होंने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मैंने उनके बड़े बड़े बूब्स उनकी पतली कमर और झाटों के बीच उनकी लाल चुत को देखकर तू मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।

मैं उनकी चुचियों को चाटने और काटने लगा और जब भी मैं उनकी चूची को काटता तो वह आह की आवाज निकालती और सिसकियां भरने लगती।

अब मैं उनकी चुत पर हाथ फेरने लगा जो कि बहुत ही गर्म हो चुकी थी। फिर चाची ने मेरा लन्ड अपने मुंह में ले लिया और उसे चाटने लगी। वह काफी देर तक मेरा लंड चूसती रही और अब मेरा लंड एकदम आकर कर खड़ा हो गया था।

मैंने अपना लन्ड चाची के मुंह से बाहर निकाला और चाची ने अपनी टांगे फैला दी। फिर मैंने थोड़ी देर चाची की चुत चाटी और अब मैं चुदाई के लिए बिल्कुल तैयार था।

मैंने चाची की टांगों को थोड़ा और फैलाया और अपना लन्ड उनकी चुत पर रखा और धीरे से एक झटका दिया। मेरा आधा लंड उनकी चुत में घुस गया और वह हल्की-हल्की सिसकियां भरने लगी फिर मैंने एक और झटका दिया तो पूरा लन्ड उनकी चुत में घुस गया और और धीरे से कराह उठी।

अब मैं तेजी से अपना लन्ड अंदर बाहर करने लगा और वह फिर क्या उड़ने लगी और सेक्सी आवाजें निकालने लगी। इस तरह मै 10 मिनट तक चोदता रहा और वह इस बीच दो बार झड़ चुकी थी लेकिन मैं अभी भी उन्हें चोदे ही जा रहा था।

फिर जब मैं अभी चलने वाला था तो मैंने अपना लन्ड चाची की चुत में से बाहर निकाला और उनके मुंह में घुसा कर जोर से एक पिचकारी मारी और सारा माल उनके मुंह के अंदर ही निकाल दिया।

चाची सारा का सारा माल गटक गई और हम दोनों शांत होकर बेड पर लेट गए। फिर थोड़ी देर बाद चाची बोली अब तुम नीचे लेट हो और मैं हूं ऊपर बैठकर मज़े लेती हूं।

मैंने कहा ठीक है। चाची ने मेरा लन्ड चूस कर उसे फिर से खड़ा किया और मेरे लैंड के ऊपर बैठकर कूदक कूदक कर चूदने लगी।

इस तरह हमने काफी देर सेक्स किया और उस दिन मैंने चाची को पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया। अब जब भी मैं चाची से मिलने उनके घर जाता हूं तो उनके कुछ ना कुछ मजे तो लेकर ही आता हूं।