नदी किनारे बनी झोपड़ी में भाभी को पेला

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आज मैं एक नहीं कहानी लेकर आया हूं जिसमें मैंने बताया है कि कैसे मैंने अपनी भाभी को भी किनारे चोद डाला। मिस करता हूं कि आप लोगों को यह कहानी पसंद आएगी।

मेरा नाम किशोर यादव है और मेरी उम्र 28 साल है। गाजियाबाद में रहता हूं और यहां मारुति सुजुकी के शोरूम में काम करता हूं। मेरी हाइट लगभग 5 फुट 9 इंच है और मेरे लैंड का साइज साडे 7 इंच और यह काफी मोटा भी है।

तो चलिए हम कहानी शुरू करते हैं। बात आज से 2 साल पहले की है जब बनारस में रहने वाले मेरे एक दूर के भाई ने हमारे परिवार को अपने घर बुलाया था।

क्योंकि मेरे पिताजी की तबीयत उस समय थोड़ी खराब थी इसलिए मेरी माता जी उनकी देखभाल करने के लिए गाजियाबाद में ही रुक गई और मजबूरी के कारण मुझे ही उनके यहां न्योता पूरा करने के लिए जाना पड़ा।

वह मेरी बहन की शादी थी। जब मैं वहां पहुंचा तो सब लोगों ने मेरा बड़े ही अच्छे तरीके से स्वागत किया लेकिन आपको तो पता ही है यूपी में भाभी देवर से बहुत ज्यादा मजाक करती है।

मैं सब लोगों से मिला लेकिन भाभी मुझे बहुत ही ज्यादा आकर्षक लगी। उसकी उम्र कोई 30 साल के करीब होगी और दिखने में तो बहुत ही ज्यादा सुंदर थी। उसके बूब्स भी मध्यम आकार के थे और उसकी पतली कमर और लचकीली गांड देखकर मैं भाभी का फैन बन गया था।

अब तो मैं सिर्फ मुझसे एक बार चोदना चाहता था अगर इस खूबसूरत आइटम के पूरे मजे लेना चाहता था। भाभी की हरकतें मेरी तरफ ज्यादा ही बढ़ती जा रही थी और मुझे लगने लगा कि भाभी भी शायद मेरे लन्ड को अपनी चुत में जाते हुए महसूस करना चाहती है।

फिर अगले दिन की बात है किसी रसम के लिए हम 6 लोग नदी किनारे पहुंचे। वहां हमें नाव में बैठकर हिंदी के बीच जाकर एक रस्म पूरी करनी थी और इस रसम में करीब 40 से 50 मिनट लगने वाले थे।

लेकिन आंखों में सिर्फ 4 लोगों के लिए ही जगह थी और मेरी उस रसम में कुछ खास मौजूदगी मायने भी नहीं रखती थी इसलिए मैंने उनसे कहा मैं यही रुक जाता हूं आप लोग रसम करके वापस आ जाइए।

फिर भाभी ने बोला अरे देवर जी आप यहां अकेले रुकेंगे अच्छा थोड़ी लगता है मैं आपके साथ रखती हूं उन्हें रसम करने के लिए जाने दीजिए। इतना कहकर वह मेरे साथ वही नदी के किनारे रेत पर बैठ गई। थोड़ी ही देर में ना हो चली गई।

अब शाम के समय हम दोनों वहां अकेले बैठे हुए थे। पता नहीं भाभी को क्या सूझी उसने मेरे ऊपर रेत फेंकना शुरू कर दिया। मैंने भी फिर उनके ऊपर लेट फेंकना शुरू कर दिया था और हम दोनों हंसने लगे। वो मेरे ऊपर आ सकती हो और मुझे नीचे बैठा कर मेरे होठों पर हाथ रख कर मुझे चूमने लगी।

उसके बदन से बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी और मैं उस खुशबू में मंत्रमुग्ध हो रहा था। मैं भी उसके लाल होठों जोर से चूसने लगा और उनका रस पीने लगा। लेकिन भाभी इतनी जोर से किस कर रही थी कि मानो मेरे होंठ ही खा जाएगी।

फिर जब हमने कहा सी देर तक किस किया तो मैंने उनके बॉस और अपना हाथ रखा और पूरे दबाने लगा। इतना होते ही वह भी पीछे हट गई और उन्होंने आसपास देखा तो एक कच्ची झोपड़ी दिखाई दी उन्होंने हाथ पकड़ा और हम दोनों झोपड़ी के अंदर चले गए।

फिर उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और एक अजीब सी नजर से मुझे देखे जा रही थी। फिर उन्होंने मुझे किस करना शुरू कर दिया और मुझे कसकर पकड़ लिया और मैं भाभी के बूब्स को अपनी छाती पर महसूस कर रहा था और मेरा लन्ड एकदम अकड़ कर खड़ा हो गया था।

फिर मैंने भाभी को लिखें घास बिछी हुई थी उस पर लेटा दिया और उनके कपड़े उतार दिए। अब वह सिर्फ खाली पड़ा और काली पैंटी में थी और एकदम किसी पोर्न स्टार की तरह लग रही थी।

फिर मैंने भी अपने कपड़े उतारे और अपना लन्ड भाभी को दिखाया। मोना मेरा लन्ड अपने मुंह में लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया।

यह पल मेरे लिए बहुत ही आनंदमय था और मैं सिसकियां भरने लगा। मुझे ऐसा लगा कि मैं उसके घर में ही घर जाऊंगा और हुआ भी ऐसा ही।

मेरा सारा वीर्य उसके मुंह के अंदर निकल गया और भाभी ने बिना कोई बूंद गिरा है सारा माल गटक गई। लेकिन मैं अभी तक तृप्त नहीं हुआ था।

एक 2 मिनट आराम करने के बाद भाभी ने मेरा लन्ड फिर से खड़ा किया और अब मैंने उनकी ब्रा और पैंटी भी उतार कर फेंक दे। ईटी टाइट चूचियां मेरे मन को भा गई और मैं उन्हें चूसने लगा और बीच-बीच में दांत से चुचियों को पकड़कर खींचता भी था।

जिसके कारण भाभी को हल्का सा दर्द होता और वह कराह उठती। फिर मेरा हाथ उनकी चूत पर गया तो उनकी चुत एकदम गीली हो चुकी थी और यह बहुत गर्म थी।

फिर मैंने की चुत की तरफ देखा तो एकदम चिकनी लाल रंग की चुत। मुझसे इंतजार नहीं हुआ और मैंने अपना लन्ड उनकी चुत पर रखा और धीरे-धीरे झटके देते हुए पूरा लंड अंदर घुसा दिया।

भाभी को अपनी आंखें घुमाते हुए मेरे गरम-गरम लंड को अपने चुत के अंदर समा गई।

मैंने उनके पैरों को चौड़ा फैलाया और झटके देने शुरू कर दिए। भाभी निढाल होकर चुदाई का मजा लेने लगी।

उसके बूब्स चूसने शुरू कर दिए और साथ में झटके भी दे रहा था भाभी मेरे बालों को सहलाते हुए मेरा साथ दे रही थी।

उसके मुंह से उम्माह….. आह्….. ओह…. आवाज़ें निकल रही थी और वो आँखें बंद करके कूदे जा रही थी । कुछ देर वो झड़ गई।

मेरा मन अभी तक नहीं भरा था और मैं उसे लगातार चोदे जा रहा था। भाभी भी अपनी चुचियों और बदन पर हाथ फेरते हुए चुदाई का आनंद ले रही थी।

करीबन 25 मिनट की चुदाई के बाद मेरा माल निकलने वाला था। मैं उनसे पूछने ही वाला था कि माल कहा निकालू। लेकिन कभी मेरे लन्ड ने एक पिचकारी मारी और सारा का सारा माल भाभी की चुत के अंदर ही निकाल दिया।

फिर हम 2 मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे फिर हम दोनों ने एक दूसरे को किस किया और अपने अपने कपड़े पहन कर के दोबारा नदी के किनारे बैठ कर बाकी लोगों का इंतजार करने लगे।