नौकरानी की सेक्स की हवस को शांत किया

हैलो दोस्तों हाजिर हूं मैं आज फिर एक नई कहानी के साथ। मै IIT की तैयारी करने के लिए कोटा मैं रहता हूं। मैं PG में रहता हूं। जिस घर में मै रहता हूं उसमें सिर्फ अंकल और आंटी सिर्फ दो लोग ही रहते थे।

वे दोनों काफी बुजुर्ग थे इसलिए उन्होंने एक नौकरानी रखी हुई थी। वो नौकरानी घर का सारा काम करती थी और लगभग सुबह से शाम तक घर पे ही रहती थी। मुझे हर रोज कोचिंग जाना होता था इसलिए मैं सुबह जल्दी घर से निकल जाता और शाम को ही वापिस आता था।

मेरी कभी कभी ही नौकरानी से मुलाकात होती थी। नौकरानी पतली सी एक 30 साल के करीब की महिला थी। मैंने कभी उसपे इतना ध्यान नहीं दिया क्योंकि मेरा सारा ध्यान पढ़ाई पर ही होता था।

लेकिन जब भी उसे मौका मिलता वह मेरे से बात करने के लिए मेरे पास आकर बैठ जाती थी। वह मुझ से मेरे परिवार के बारे में पूछती और पूछती थी कि मेरा यहां मन लगता है कि नहीं। मैं उसकी बातों का जैसे-तैसे जवाब देकर वहां से निकलने की कोशिश करता था। एक दिन की बात है मुझे उस दिन छुट्टी थी मैं घर पर ही था।

दोपहर का समय था अंकल और आंटी खाना खा रहे थे तभी वह नौकरानी मेरे कमरे में बाल्टी और पोछा लेकर आई और कहने लगी कि उसे यहां की सफाई करनी है मैं बेड पर बैठा था और मैंने कहा कोई बात नहीं कर लो।

जब वह पोछा लगा रही थी तो उसके ब्लाउज में से उसके बूब्स मुझे साफ दिख रहे थे मैं उसके बूब्स की तरफ घूर घूर कर देखने लगा मेरा लन्ड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और कामवासना मेरे पूरे शरीर में फैल चुकी थी अब मैं उसे चोदने की पूरी तैयारी में था।

कभी उसने मेरी तरफ से देखा और बोला क्या यह नजारा तुम्हें पसंद आ रहा है? मैंने कहा हां बहुत पसंद आ रहा है। उसे भी चुदने का मन था इसलिए वह मेरे पास आकर बैठ गई और उसने पैंट के ऊपर से मेरे लन्ड को पकड़ लिया।

मैंने भी अचानक से उसका पल्लू हटाया और उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके बूब्स को मसलने लगा। उसे भी मज़ा आने लगा था तभी मैंने इसका ब्लाउज खोल दिया। उसने नीचे ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी और उसके मध्यम आकार के बूब्स मेरे सामने थे।

उसने भी मेरी टीशर्ट उतार दी और फिर मैंने अपनी पैंट भी खोल ली। उसने कमरे की कुंडी लगा दी और मेरा अंडरवियर खोल कर अपनी सारी भी उतार दी। उसने सिर्फ पेटिकोट पहन रखा था।

उसने पेटीकोट नहीं खोला और मुझे नीचे लेटा दिया और मेरे लन्ड को अपनी चुत में डाल कर उसके ऊपर बैठ गई और ऊपर नीचे करने लगी। मुझे बहुत मजा आने लगा था मैंने दोनों हाथ से उसके दोनों दूध पकड़ लिए और उन्हें जोर जोर से दबाने लगा। त

अचानक से आंटी ने नौकरानी को आवाज दी उन्हें किसी चीज की जरूरत थी। हमारा दोनों का मूड खराब हो गया। हम दोनों सेक्स रोकना तो नहीं चाहते थे लेकिन हमें रुकना पड़ा और वह कपड़े पहन कर नीचे चली गई।

मैं बहुत निराश हुआ लेकिन मैं क्या थी कर सकता था मैं बाथरूम में गया और मुट्ठ मार कर वापस आ गया। लेकिन उस दिन मुझे पता चल गया कि नौकरानी प्यासी है और उससे कितने की बहुत ज्यादा प्यास है। नौकरानी को भी पता चल गया था कि वह अपने चोदने की प्यास मेरे पास आकर बुझा सकती हैं।

फिर एक हफ्ते बाद हमें मौका मिल ही गया आंटी की थोड़ी तबीयत खराब थी इसलिए उन्हें उस अस्पताल ले गए और अंकल जी उनके साथ ही चले गए घर में मैं और नौकरानी अकेले थे और इससे अच्छा मौका हमें और नहीं मिल सकता था।

मैं नौकरानी को उठाकर अपने कमरे में ले गया और उसे जाकर बेड पर पटक दिया। मैंने उससे पूछा कि आज का क्या मूड है। तो उसने जवाब दिया कि मूड बहुत अच्छा है आज तो कोई डिस्टर्ब करने के लिए भी नहीं है।

फिर क्या था मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और अपने भी सभी कपड़े उतार लिए। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उस से जोर-जोर से चूमना शुरू कर दिया। उसमें भी मदहोशी छाने लगी और उसने भी मुझे चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर से जुम्मे के बाद मैंने अपना लन्ड निकाला और उसे कहा कि वह अपने मुंह में डाल ले।

उसमें मेरा लंड पकड़ा और अपने मुंह में डालकर बड़ी अच्छी तरह से पूछने लगी। लंड चूसते चूसते कभी-कभी मेरे टट्टो को भी चूसने लगती। फिर मैंने उससे नीचे लेटा दिया और की चुत पर अपना लन्ड रख दिया। उसकी चुत झांटों के बीच में बहुत ही ज्यादा कमाल लग रही थी।

इसका पूरा शरीर गरम हो गया था और कामवासना उस पर पूरी तरह हावी हो चुकी थी। वह बोलने लगी थी डाल दो अपना लन्ड मेरी चुत में और फाड़ डालो मेरी चुत को। मैं समझ गया कि उससे अब और ज्यादा इंतजार नहीं होगा इसलिए मैंने उसकी चूत और अपने लन्ड पर थोड़ी सी वेस्लिन लगाई और उसकी चुत पर लंड रखकर थोड़ा सा धक्का दिया।

पहला धक्का देखते ही मेरा लंड थोड़ा सा फिसल कर दूसरी तरफ चला गया लेकिन फिर अब मैंने लंड को अपने हाथ से पकड़ के चुत पर रखा और एक और झटका दिया। इस बार मेरा आधा ल** उसकी च** में घुस गया था और वह करहाने लगी और ओहह.., आहह…, हाय मां मार गई, जैसी आवाजें निकालने लगी।

उसकी यह कामुकता वाली आवाजें सुनकर मेरा लन्ड तो और ज्यादा अकड़ गया और इस बार मैंने पूरा लंड उसकी चुत में घुसा दिया। मैं उसे चोदने लगा। वह भी चूदाई के पूरे मजे लेने लगी। लगातार करीब 10 मिनट तक छोड़ने पर वो झड़ गई और मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने से कहा कि अपना मुंह खोलो मेरा माल निकलने वाला है।

मैंने सारा माल उसके मुंह में डाल दिया और वह भी उसे चाटते हुए सारा का सारा निगल गई। यह हम दोनों साथ आते थे इसलिए मैं थोड़ी देर आराम किया और उसने पूछा कि एक और बार करोगे मैंने भी हां कर दिया और हम दोनों एक साथ से सेक्स करने के लिए तैयार थे।

उसने लंड मुंह में लिया और अच्छे से चूसते हुए उसे फिर से पूरी तरह खा कर दिया। इस बार मैंने उसे घोड़ी बनाया और उसे तेजी से चोदने लगा। वह फिर से सिसकियां भरने लगी और सेक्सी मेरी आवाज निकालने लगी। बोलने लगी और जोर से चोदो, आज मेरी बस की सारी प्यास बुझा दो।

मैंने कहा कोई बात नहीं जान आज तुम्हारी सारी प्यास बुझा दूंगा। करीबन 15 मिनट तक मैं उसे चोदता रहा फिर मैंने उससे पूछा कि मेरा माल निकलने वाला है तो कहा निकालू। तो उसने बोला सारा माल अंदर ही निकाल दो। मैंने सारा माल की चुत के अंदर ही निकाल दिया और उसे कस के गले लगा लिया।

वह भी मुझसे लिपट गई और मुझे चूमने लगी। थोड़ी देर में एक दूसरे को चूमने और चाटने के बाद हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए। उसने अपने कपड़े पहने और मैंने अपने कपड़े पहन लिए। वह बोली आज बहुत मजा आया फिर कभी मौका मिला तो फिर ऐसा मजा लेंगे।

मैंने कहा ठीक है और वह अपने घर को चली गई। मैं भी आंटी का हाल समाचार लेने अस्पताल की तरफ चल पड़ा।