मैडम की तन्हाई चुत चोद के मिटाई

हेलो दोस्तों मेरा नाम आयुष गुप्ता है और मैं अहमदाबाद में रहता हूं। मेरी उम्र 24 साल है और मुझे सेक्स स्टोरीज पढ़ना बहुत ही ज्यादा अच्छा लगता है।

आज मैं आपको अपनी कहानी बताने जा रहा हूं उम्मीद करता हूं कि आपको यह कहानी पसंद आएगी। मेरे कॉलेज में हमारे अकाउंट की टीचर मुझे बहुत ज्यादा अच्छी लगती है।

उनका नाम वंदना शर्मा है और उनकी उम्र 36 साल के करीब है। उनके 36 के बूब्स 30 की कमर और 36 की गांड वाली फिगर पर कॉलेज के सभी लड़के मरते थे। मैडम शादीशुदा थी और शायद उनके दो बच्चे भी थे।

जब भी वह पढ़ाने के लिए हमारी क्लास में आती थी तो मैं सिर्फ उनको निहारता ही रहता था। मैं घर जाकर उनको याद करके कई बार मुठ मार चुका था।

कभी-कभी हमें मैडम के बूब्स के दर्शन हो जाते थे जब कभी वह गिरा हुआ समाज निकालने के लिए झुका करती थी। अब परीक्षा का समय आ गया था और हम सभी लोग परीक्षा की तैयारी करने लगे थे।

लेकिन मेरे मन में मैडम के ख्याल घूमते रहते थे। फिर एक दिन मैं उनके ऑफिस पहुंच जाऊं पर उन्हें कहा कि मैडम मुझे इस चैप्टर में थोड़ा सा समझा दीजिए मुझे इसमें बहुत ज्यादा कंफ्यूजन हो रहा है।

उन्होंने कहा आयुष अभी तो मेरे घर जाने का समय हो गया है मैं तुम्हें कल समझा दूंगी। मेरे कंधे पर हाथ रखा और थपथपाते हुए चली गई। उनका स्पर्श मात्र पाते ही मेरा लन्ड खड़ा हो गया और मैसेज है बाथरूम में गया और मुठ मारी।

फिर अगले दिन में मैडम ऑफिस में पहुंचा तो मैडम बोली अरे आज मुझे बहुत काम है तुम ऐसा करना शाम को किताब लेकर मेरे घर आ जाना मैं वहां तुम्हें सब कुछ समझा दूंगी। मैंने वैसा ही किया और शाम को मैडम के घर पहुंच गया।

मैडम ने एक शॉर्ट टी-शर्ट पहन रखी थी और पजामा पहन रखा था। इस तरह के कपड़ों में मैडम बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी। उनकी हाइट भी कुछ ज्यादा नहीं है इसलिए उन पर यह कपड़े बहुत अच्छे लग रहे थे।

इनका पजामा उनकी दोनों कान के बीच घुसा हुआ था और जैसे मैंने यह नजारा देखा मेरा तो लंड खड़ा हो गया। फिर मैडम मुझे सोफे पर बैठने को कहा और उन्होंने साथ पढ़े एक बुक्शेल्फ के ऊपर से किताबें उतारने शुरू की।

क्योंकि किताबें उसी जगह पर रखी थी इसलिए उन्हें वहां तक पहुंचने में दिक्कत हो रही थी। जब भी वह अपना हाथ उठाती तो उनकी टीशर्ट ऊपर की तरफ जाती है और उनकी कमर मुझे साफ दिखाई देती है।

मेरा लन्ड अब पेंट फाड़ कर बाहर निकलने को उतावला हो रहा था। फिर मैंने कहा मैडम मैं उतार देता हूं आप बैठ जाइए। जैसे ही मैं उठा मैडम बैठने वाली थी तभी उनके बूब्स मेरे मुंह से टकरा गए। मैंने मैडम को सॉरी कहा लेकिन उनका अरे कोई बात नहीं। फिर जैसे ही मैंने बुक आने के लिए हाथ ऊपर किया मेरा खड़ा हुआ लंड पैंट के अंदर से उभरने लगा।

मैडम ने उसे देख लिया और मेरी तरफ शरारत भरी आंखों से देखने लगी। उन्होंने कहा इस चीज के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है। मैंने मैडम से पूछा किस चीज के बारे में। उन्होंने कहा अनजान मत बनो तुम्हें सब पता है मैं किस चीज के बारे में पूछ रही हूं।

मैं डर रहा था इसलिए मैंने फिर पूछा मैडम किस चीज के बारे में। उन्होंने कहा सेक्स के बारे में। क्या तुम मेरे साथ सेक्स करने के सपने नहीं देखते। इतना सुनते ही मैंने मैडम को अपनी बाहों में भर लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

उनके हल्के गुलाबी रंग के सूट बड़े ही नरम थे और मैं उन का रस पीने लगा। मैडम का चेहरा पूरा लाल हो गया था और अब वह भी मुझे फ्रेंच किस करने लगे। फिर मैंने मैडम की आंखों में देखा तो वह बड़ी ही प्यारी आंखों से मेरी तरफ देख रही थी।

उन्होंने मेरे टीशर्ट को पकड़कर अपनी और खींचा और मुझे फिर से किस करने लगी। अब उन्होंने अपना हाथ मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लन्ड पर रख दिया था। बाबू मेरे लंड को अपने हाथों से सहला रही थी। मैंने मैडम की टीशर्ट उतार दी और उनके बूब्स को निहारने लगा।

मैडम के गोरे गोरे बूब्स बहुत कमाल के लग रहे थे। क्यों मैंने उनकी ब्रा भी उतार दी और उनकी काले रंग की सूचियों को मुंह में लेकर चूसने लगा। मैडम ने भी मेरे कपड़े उतारने शुरू किए और उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया।

मैं मैडम के पूरे जिस्म को अपनी जीभ से चाट रहा था और अपने हाथ से उनकी चुत को सहला रहा था। हल्की-हल्की सिसकियां भर रही थी और मुझे भी सहला रही थी।

फिर घूमने मेरा लन्ड पकड़ा और उसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। जैसे ही मोहनी मेरे लन्ड के सुपारी को चूसा मेरी आह निकल गई और मैं सोफे को कस के पकड़ कर आनंद लेने लगा।

मैडम काफी देर तक मेरे लोड़े को चुस्ती रही। बाबा मैं मैडम को चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार था इसलिए मैंने उनकी पैैंटी उतारी और उनकी चुत के दर्शन किए।

बड़ी बड़ी झांटों के बीच में उनकी लाल रंग की चुत किसी महारानी की तरह लग रही थी और मैंने अपनी अंगुली उनकी चुत में धीरे से घुसाई।

वो कराह उठी और उफ्फ…. अम्ह… करने लगी।

काफी देर तक मैंने उनकी चुत में उंगली की और जब मुझे लगा कि मैडम अब चुदने के लिए बिल्कुल तैयार है तो मैंने उनकी चुत पर अपना लन्ड रखा और एक झटका देते हुए लंड का सुपारा उनकी चुत के अंदर घुसा दिया।

मैडम हल्की-हल्की सिसकियां लिखती हुई अपनी चुत को रगड़ने लगी और मैं धीरे-धीरे झटके देता वह अपने लन्ड को पूरा मैडम की चुत में घुसा दिया।

जब मेरा दिल पूरा मैडम की सूरत में घुस गया तो मैडम के मुंह से अम्महहहहह…… की एक संतुष्टि पूर्ण आवाज निकली और उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया।

फिर मैंने झटके देने शुरू किए और मैडम को जब भी झटके देता तो उनके बूब्स आगे पीछे हिलते इसे देखकर मैं और ज्यादा मंत्रमुग्ध हो जाता।

अब मैंने झटको की स्पीड बढ़ा दी और किसी ट्रेन की तरह चप चप की आवाज़ें निकलते हुए उन्हें अच्छी तरह से चोदने लगा।

वो भी अब आहहह…. उफ्फफ्फ…. फक… ज़ोर से… हाय मा मै मर गई…. करते हुए चुदाई का आनंद लेने लगी। थोड़ी ही देर में मैडम झड़ गई और उनकी चुत से पानी निकलने लगा।

फिर मैंने मैडम की थोड़ी देर तक चुत चाटी और मैडम को डॉगी स्टाइल में घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी चुत में लंड डालकर तेजी से चोदने लगा।

अब मैडम को मैं बीच-बीच में गांड पर जोर से तमाशा भी मारता था और मैडम अपनी गांड उठा कर मेरा अभिवादन स्वीकार करती थी।

किसी तरह करीबन 15 मिनट की जुदाई के बाद जब मैं आज झड़ने वाला था तो मैंने मैडम को कस कर पकड़ा और सारा माल उनकी चुत के अंदर ही निकाल दिया।

मैं 5 मिनट तक मैडम के ऊपर इसी तरह लेटा रहा और उन्हें चूमता रहा। फिर मैडम उठी और उन्होंने अपने आप को साफ करके कपड़े पहने और मेरे लिए एक बढ़िया सी कॉफी बना कर लाई। मैंने कॉफी का आनंद लिया और मैडम से फिर से मिलने का प्रॉमिस करके अपने घर चला गया।