दोस्त की माँ को अपनी रखैल बनाया – 1

हेलो फ्रेंड्स !! कैसे है आप सभी में आसा करता हु की आप सही बहुत अच्छे होंगे। मै कई दिनों से सोच रहा था की अपनी यह कहानी आप सभी के लिए लिखू। यह कहानी आज से ७ साल पुरानी जब मेने कॉलेज मै एडमिशन लिया था। कॉलेज मै कबीर से मेरी दोस्ती बहुत हो गई थी। यह कहानी मेरे और कबीर की माँ की है। तो चलिए जल्दी से शुरू करते है।

मेरा नाम रोहन है और मेरे दोस्त की माँ का नाम पूजा , मै उन्हें पूजा आंटी ही बोल कर बुलाता हु। पूजा आंटी के बारे मे आपको बता दू, अनूठी एक मस्त गदराया हुआ माल है, उनका फिगर (३६-३२-४०), कसम से दोस्तों अगर कोई उन्हें एक बार देख ले तो बस देखता ही रहे।

(एक दिन मे कबीर के घर उससे मिले गया और गेट नॉक किया। गेट पूजा आंटी ने खोलो।

आंटी :- अरे रोहन तुम यहाँ।
मै :- नमस्ते ! आंटी वह कबीर है क्या घर पे ???
आंटी :- नहीं रोहन कबीर तो घर पे नहीं है, आओ अंदर आओ।

फिर मै अंदर हॉल मे जा कर बैठ गया और आंटी भी मेरे साथ ही हॉल मे बैठ गई।

आंटी :- हां तो रोहन बताओ क्या लोगो, चाय या कॉफ़ी ???
मै :- नहीं आंटी कुछ बस पानी पीला दो।

फिर आंटी सोफे से उठ कर किचन की तरफ जाने लगी पानी लेने, जब वह जा रही थी तब उनकी गांड देख कर तो मेरे लंड मै हलचल होने लगी। सच बोलू तो आंटी का जिस्म था बहुत सेक्सी पर ऊके जिस्म के मे उनकी गांड सबसे ज्यादा सेक्सी थी। जब आंटी जब भी मार्किट जाती होगी तो एसा कोई मर्द नहीं होगा जो उनकी गांड की तरफ न देख रहा होगा।

माफ़ करना दोस्तों मै कबीर के पापा के बारे मै तो बताना ही भूल गया, कबीर का पापा की डेथ बहुत पहले हो चुकी कार एक्सीडेंट मे, तब कबीर १२ साल का था पर कबीर के पापा जब जिन्दा थे तब उन्होंने बहुत पैसे कमाए थे। तो उन्ही पैसो से कबीर और आंटी का खर्चा चलता था।

जब मे सोफे पर बैठा था तब मुझे थोर्डा अजीब सा लगा बैठने मे तो मैने सोफे का गदा उठा कर देखा तो वह एक डिलडो रखा था उससे देख कर मै शॉक हो गया, अभी वह डिलडो मेरे हाथ मै ही था कि आंटी पानी ले कर हॉल में आगई, और मेरे हाथ में डिलडो देख कर घबरा गई।

मै :- आंटी आप इस का भी उसे करती है क्या ????
आंटी :- रोहन प्लीज यह बात किसी को मात बताना वार्ना मेरी बहुत बेज़्ज़ती को कि समाज।

फिर आंटी मेरे पास आकर बैठ गई।

मै :- पर आंटी आप यह सब क्यों उसे करती हो ??
आंटी :- रोहन अब तुम बड़े हो गए हो, तो तुम्हे तो पता ही होगा कि हर औरत की अपनी कुछ जरूरते होती है। और कबीर के पापा की डेथ के बाद मै बहुत अकेली हो गई थी।

यह बोलते हुए आंटी रोने लगी। और आंटी का रोना मुझसे देखा नहीं गया तो मेने उनके आंसू पोंछ दिए, और उन्हें गले लगा लिया। आंटी को गले लगते ही आंटी की बड़ी बड़ी चूचिया मुझे से टकराई तो मेरे शरीर में करंट सा सा लगा और मेरा लैंड खड़ा हो गया।

मेरे लैंड ने अब मेरे पैंट से झाकना या यु कहु की मेरा लंड अब बहुत स्ट्रांग हो गया था। जब अब आंटी को भी फील हो रहा था, पर आंटी ने कुछ नहीं कहा।

कुछ देर बाद जब हम अलग हुए तब आंटी ने मेरी पैंट की ओर देख कर एक स्माइल पास की और खड़ी हो कर बैडरूम की तरफ जाने लगी। उनकी गांड पीछे से देख कर मुझसे रहा नहीं गया क्यों की वह इस अंदाज से अपनी गांड को मटकाती हुई चल रही थी मानो की उनकी गांड मुझे बुला रही हो की आओ मुझे चोदा।

अब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैने पीछे से जा कर आंटी को उन्हें पीछे से गले लगा लिया।

आंटी:- आआ रोहन यह तुम क्या कर रहे हो ???
मै :- आपको प्यार कर रहा हु आंटी।
आंटी :- नहीं रोहन यह गलत है अगर किसी को पता चल गया तो मै किसी को अपना मुँह नहीं दिखा पाउगी।

मै:- किसी को कुछ पता नहीं चलेगा आंटी, मै किसी को कुछ बताउगा नहीं और नहीं आप किसी को कुछ बताना।
आंटी :- पर रोहन अगर कबीर को पता चल गया तो क्या होगा ???
मै :- कुछ नहीं होगा आंटी कबीर को भी कुछ नहीं पता चलेगा। मै आपसे बहुत प्यार करता हु आंटी।

यह बोलते हुए मैने आंटी को अपने ओर घुमा लिया और उनके किस करने लगा। थोर्दी देर मे आंटी भी मेरा साथ देने लगी और हम दोनों एक दूसरे को एसे किस कर रहे थे मानो जन्मो के प्यासे हो।

किस करते करके मैने आपने हाथ आंटी की गांड पे रख कर सेहला रहा था।

मै :- आंटी आपकी यह गांड बहुत सेक्सी एंड बड़ी है।
आंटी :- रोहन तुम मुझे आंटी मत बोलो , सिर्फ पूजा। और यह गांड अब तुम्हारी ही है।

मै:- अच्छा बाबा पूजा, यह बाताओ तुम्हारी गांड इतनी मोती कैसे हुई ???
आंटी:- कबीर के पापा मेरी गांड रोज मरते थे, उन्हें मेरी गांड बहुत अच्छी लगती थी, वह हमेशा मेरी छूट मरने के बाद मेरी गांड जरूर मरते थे। शुरू शुरू मै तो मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता था पर बाद मे मुझे भी गांड मरवाने मे मज़ा आने लगा था।

मै :- पूजा मुझे भी तुम्हारी गांड बहुत अच्छी लगती है।
आंटी :- आज से तुम्ही हो मेरी गांड के मालिक जब भी मन करे और इतना मान करे मार लेना मेरी गांड, मै कभी मना नहीं करुँगी।

यह सब बातो के बिच में मैने पुजा आंटी के जिस्म से सारे कपडे उतर दिया और उन्हें पूरा नंगा कर दिया।

आंटी :- अरे रोहन तुमने तो मुझे पूरा नंगा कर दिया और खुद सारे कपडे पहने हो ??
मै :- अरे मेरी जान अब तुम ही उतार तो मेरे कपडे।

फिर आंटी मेरे कपडे उतारने लगी और मेरा लंड देखते ही उनकी आखे चमक सी गई। और उन्होंने घुटनो पर बैठ कर मेरे लैंड को मुँह में ले कर चूसने लगी, आंटी बहुत प्यार से मेरा लंड चूस रही थी।

आंटी :- रोहन अब मुझे चोदो , मेरी चुत की आग को बुझा दो।

फिर मै आंटी को बीएड पे ले गया, और उन्हें लेता कर उनकी चुत में लंड डालने लगा।

आंटी :- आआ आआ अअअअअ आआ आए आआ आआ चोदो मुझे रोहन और जोर से चोदो।
मै :- यह लो मेरी रानी आपकी चुत में तो बहुत गर्मी है मेरा लंड मानो किसी तंदूर मे जा रहा हो।

आंटी :- मुझे रानी मात बोलो रोहन मुझे रंडी या कुतिया बोलो, मुझे अपनी रखैल बना लो। मुझे इतना चोदो की मे तुम्हारी गुलाम बाण जाउ।

२५ मिनट की ताबड़ तोड़ चुदाई के बाद मेरा निकलने वाला था, तो मैने आंटी को उनके घुटने पे बैठा कर अपना लंड उनके मुँह में दे दिया।
और आंटी भी एक अच्छी रैंड की तरह मेरा लंड चूसने लगी। २-४ मिनट बाद मेरा मुठ आंटी की मुँह के अंदर ही निकल गया। और आंटी भी सारा मुठ पी गई।

अभी के लिए बस इतना ही अगले पार्ट में बताउगा की कैसे मैने आंटी की गांड मारी और उन्हें अपनी रखैल बना लिया, अगला पार्ट जरूर पड़ियेगा।

धन्यबाद