दीदी की इच्छा चुदाई कि

हैलो दोस्तों। मैं आपके साथ कुछ साझा करना चाहती हूं। मेरा नाम पायल है और मेरे परिवार में कोई नहीं है केवल मेरा छोटा सौतेला भाई है। मेरे माता-पिता एक बेटा चाहते थे लेकिन उन्हें एक बेटी मिली, मैं। उन्होंने मुझे कभी प्यार नहीं दिया। मेरे जन्म के बाद वे गर्भ धारण करने में विफल रहे इसलिए उन्होंने एक पुत्र को गोद लिया।

शुरू में मुझे अपने भाई से नफरत थी लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया सभी नफरत प्यार में बदल गई। फिर हमारे जीवन का सबसे बुरा दिन आया, हमारे माता-पिता की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मैं 22 साल की थी और मेरा भाई 19 साल का था।

समय गुजरता गया, मैं 25 की हो गई और एक दिन मेरा भाई मेरे पास आया और बोला

मेरा भाई: दीदी, मैं चाहता हूं कि आप किसी से मिलें।

मेरा भाई: दीदी नेहा नेहा दीदी।

मैं: नेहा?

मेरा भाई: मेरी गर्लफ़्रेंड।

मुझे पता नहीं क्यों लेकिन मुझे यह सुनकर बुरा लगा। नेहा समझ गई कि मुझे बुरा लगा और उसने यह मेरे भाई को बता दिया। नेहा के जाने के बाद वह मेरे पास आया।

मेरा भाई: दीदी, नेहा कह रही थी तुम उदास हो।

मैं: हां, जब मैं यहां हूं, फिर नेहा क्यों है?

मेरा भाई: दीदी, मैं समझा नही।

मैं: कुछ है जो मैं चाहती थी और नेहा की वजह से वह मुझे नहीं मिलेगा।

मेरा भाई: दीदी, आप बस बताओ, मैं आपको ला के दूंगा।

मैं: सेक्स, तुम्हारे साथ, मैं करना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ, तु मेरी विर्जिनिटी ले और मैं तुम्हारी।

वह उठकर बस चला गया। करीब एक घंटे बाद वह वापस आया, नेहा उसके साथ थी। मैं समझ गयी कि मेरे भाई ने उसे हमारी बात के बारे में बता दिया।

नेहा: तुम मेरे बॉयफ्रेंड को चोदना चाहती हो, तुम्हें सज़ा दी जाएगी।

फिर उसने अपनी जेब से एक हथकड़ी निकाली और मुझे बिस्तर पर हथकड़ी लगा दी, और मेरे पैर भी बांध दिए। फिर उसने मेरे कपड़े फाड़ दिए। मैं बिस्तर पर नंगी पड़ी थी।

मेरा भाई: दीदी आपके बूब्स कमाल हैं और चिकनी चूत के तो क्या कहने।

मैंने देखा, मेरे नंगे शरीर को देखकर मेरे भाई का लंड पत्थर जैसा सख्त हो गया था।

नेहा: हाँ, देखो, ध्यान से देखो, तुम्हारे भाई का शरारती लंड उसकी पैंट से बाहर आना चाहता है। तुम उसका लंड देखना चाहती हो? तुम उसका लंड चूसना चाहती हो? तुमको उसका लंड चाहिए?

मैं: हाँ, हाँ, हाँ! मैं चुदना चाहती हूँ।

नेहा: किससे?

मैं: अपने भाई के लंड से।

फिर नेहा ने मेरे भाई की जीन्स में हाथ डाल के बोला,

नेहा: शाबाश! चलो एक खेल खेलते हैं, जो पहले तुम्हारे भाई का शरारती लंड उसकी पैंट से बाहर निकालेगा, उसी को पहला मौका मिलेगा चुदाई का।

मैं: यह गलत है, मेरी हथकड़ी खोलो।

नेहा: अरे हथकड़ी की चाबी कहां है, अरे हाँ यहाँ है।

फिर उसने अपने हाथ में चाबी ली और अपनी पैंट में घुसा दी।

नेहा: आपको चाबी चाहिए दीदी तो मेरी चूत से निकाल लो।

फिर मेरे भाई ने नेहा के कपड़े उतार दिए और नेहा ने मेरे भाई के कपड़े उतार दिए सिवाय उसके अंडरवियर के।

नेहा के नंगे शरीर को देख मुझे भी कुछ कुछ महसूस हुआ। उसके बूब्स एकदम गोल और गहरे रंग के निपल्स हाय! देख कर ही मज़ा आ गया।

मैं अपने भाई के अंडरवियर पर उसके लंड के उभार को देख सकती थी। नेहा मेरे चेहरे पर आकर बैठ गई और मेरा भाई मेरी चूत से अपना लंड सटा के बैठ गया और नेहा के बूब्स चूसने लगा और मेरे बूब्स दबाने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था लेकिन मुझे उसका लंड मेरी चूत में चाहिए था इसीलिए मैंने नेहा की चूत को तेजी से खाना शुरू कर दिया।

नेहा: ब… हु… त… बढ़ि… या! दी.. दी.. चाबी ढूँढो जल्दी।

अचानक मुझे अपने भाई का लंड महसूस नहीं हुआ, मुझे लगा मैं हार गई लेकिन,

मैं: आह…!

मेरे भाई ने अपना लंड पूरी ताकत से मेरी चूत में अंदर तक घुसा दिया।

मैं: नेहा मेरी हथकड़ी खोलो।

उसने मेरी हथकड़ी खोल दी। मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर के चारों ओर लपेट दिया और दूसरे हाथ से उसके स्तन दबाने लगी।

मेरा भाई: दीदी तुम कहो और मैं नहीं करता?

ओर उसने उसने मुझे चोदने की गति बढ़ा दी और मैं नेहा की चूत को कुल्फी की तरह चाटने लगी, फिर क्या, नेहा मोबाइल की तरह ही कांपने लगी।

मैं: हां भाई! तेजी से और तेजी से।

मेरा भाई अपना लंड मेरी चूत में तेजी से अंदर बाहर करने लगा। अचानक मुझे अपनी जांघ पर नेहा का हाथ महसूस हुआ।

अब नेहा की चूत को भी अपने लंड का स्वाद दो भाई।

मेरे भाई बिस्तर पर लेट गया, नेहा उसके लंड पर और मैं उसके चेहरे पर बैठ गई।

नेहा: आह… आह… आह… आह… आह… आह… आह…

मैं: आह… आह… आह… आह… आह… आह… आह…

हमारे कराहने ने उसे और अधिक सक्रिय कर दिया और उसने हमें चोदने की गति और बढ़ा दी।

नेहा: मैं अपना सफेद गाढ़ा प्रेम रस छोड़ने वाली हूं।

मेरा भाई: मैं भी। दीदी मेरा लंड चूसो।

मैं: बिल्कुल।

और मैंने उसका लंड अपने मुँह में घुसेड़ लिया।

मेरा भाई: नेहा यहाँ आओ और अपना रस मेरे मुँह में डालो।

नेहा: बिल्कुल।

नेहा ने अपनी चूत उसके चेहरे पर रख दी और मेरा भाई नेहा की चूत चूसने लगा।

मेरा भाई: दीदी रुकना मत, जीभ का उपयोग कर जीभ का।

कुछ ही पल के बाद उसने अपना प्यार का रस मेरे मुँह में छोड़ दिया और नेहा ने अपना प्यार का रस छोड़ दिया। मेरे भाई का सफेद गाढ़ा रस मेरे मुंह से बह निकला और नेहा उसे चाटने लगी और मैं और नेहा मेरे भाई के सफेद गाढ़े प्रेम रस को मुँह से मुँह में एक दूसरे को देने लगे।

अपना वजन कम करने के बाद उसका लंड सामान्य हो गया लेकिन चूँकि उसका रस हम पर था इसलिए हमने उसे क्रीम की तरह अपने बूब्स पर रगड़ना शुरू कर दिया। और जैसा कि मैं जानती और चाहती थी, उसका लंड फिर से सख्त हो गया था।

मेरा भाई: मेरा लंड तुम दोनो की चूत का दूसरा चक्कर चाहता है।

मैं और नेहा: रोका किसने है।

[आगे की कहानी अगले भाग में।]