देसी भाभी की मस्त चुदाई

हेलो दोस्तों आज मैं आपके लिए एक देसी भाभी के साथ सेक्स की कहानी लेकर आया हूं। उम्मीद करता हूं आपको यह कहानी पसंद आएगी। मेरा नाम राकेश है और मैं 25 साल का हूं। मेरे नाम का साइज साढ़े छह इंच है और डेढ़ इंच मोटा भी है।

मैं मुरादाबाद से चालीस किलो मीटर दूर एक छोटे से कस्बे में रहता हूं। हमारा कस्बा किसी छोटे शहर जैसा ही है और यहां हर सुविधा उपलब्ध है। क्योंकि मेरी मेन रोड पर एक दुकान है इसलिए मैं सारा दिन वहीं बैठा रहता हूं और आती जाती लड़कियों को ताड़ता रहता हूं।

अब मैं मेरी कहानी पे आता हूं, यह लगभग 2 महीने पहले की बात है जब मेरे किसी दोस्त ने मुझे एक भाभी का नम्बर दिया जिसका नाम माधुरी था। तो मैंने उससे अपने दोस्त की पहचान से बात करना शुरु किया और बाद में हमारी अच्छी पहचान हो गई।

जब मैं उससे पहली बार मिला तो उसे देखता ही रह गया, गेहुँआ रंग, चेहरे से ज्यादा सुंदर तो नहीं लेकिन फिगर ऐसा कि जैसे सिर्फ चुदने के लिए बनी हो, 36 के बूब्स, 30 की कमर और 34 के चूतड़। दिखने में वो 35 साल की लगती थी। जब वो चलती तो ऐसे लगता कि अभी इसे पटक कर चोद दूँ।

उसके मुहल्ले के सारे लड़के उसके दीवाने थे मगर वो अपने मुहल्ले में किसी को भाव नहीं देती थी। मैंने उससे फोन पर बातें चालू के दी और जब भी वो कभी मेरे आस पास से गुजरती तो उसे लाइन मारने लगता। धीरे धीरे वो भी मुझे लाइन देने लगी।

मैं अब हर रोज अपनी दुकान पर सुबह सुबह भाभी का इंतजार करता क्योंकि वह हर रोज़ मेरी दुकान के आगे से जाया करती थी। हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुराते और कभी कभी सलाम नमस्ते भी हो जाता था।

एक दिन सुबह मैं लेट उठा था तो उस टाइम तक भाभी चली गई थी। अगले दिन मैं इंतज़ार करने लगा कि तभी भाभी आ गई तो आंटी ने मेरी तरफ देख कर स्माइल की तो मैं भी मुस्कुरा दिया।

तभी भाभी मेरी दुकान के गेट के पास आ गई और मुझसे बात करने लगी-आप कल शॉप पर नहीं थे, क्या बात, तबियत तो ठीक है आपकी। मैंने भी झूठ ही कह दिया मेरे सर में दर्द था तो मैं लेट आया था। तभी भाभी बोल पड़ी क्यों क्या हुआ। मैं बोला बस ऐसे ही दवाई खा ली थी तो आराम आ गया।

मैं बात करते करते आंटी के बूब्स को घूर रहा था जो शायद भाभी ने भी नोट कर लिया था तो भाभी बोली ऐसे क्या देख रहे हो मैंने कहा कुछ नहीं भाभी जी। भाभी बोली अरे शरमा क्यों रहे हो। सीधे ही कह दो कि मेरी छाती पर नजर लगाये बैठे हो। मैं एक बार तो घबरा गया फिर बोला क्या करूँ भाभी, आप हो ही इतनी खूबसूरत कि नजर हट ही नहीं रही।

फिर वो स्माइल करती हुई चली गई। उनको जाते हुए देख मैं उनकी मस्त मोटी गांड को देख रहा था तभी वो वापिस घूमी और उन्होंने मुझे उनकी गांड देखते हुए देख लिया और स्माइल करके चली गई। फिर मैं भी उनके नाम की मुठ मार कर अपने काम में लग गया।

अब मैं रोज रात को भाभी के सपने देखा करता था और भाभी को सपने में भी जम कर चोदता था। भाभी मेरी रातों की नींद पूरा करने जा चुकी थी। वह हर पल मेरे ख्यालों में ही रहने लगी थी। अब हमारी फोन पर भी बातें ज्यादा होने लगी थी हम दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगी।

कुछ दिनों बाद भाभी ने फोन करके मुझे अपने घर पर बुला लिया। फिर हमने शाम को मिलने का प्रोग्राम बनाया। शाम को मैं बताये हुए पते तो भाभी ने घर का दरवाजा खोला तो मैं देखता ही रह गया।

तो मैंने भाभी को अपने पास बिठाया और उनके होंठों को चूसने लगा। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैं अपने एक हाथ से उनके बूब्स दबाने लगा और दूसरे से उनकी चूत को सहलाने लगा। वो भी मूड में आ गई और उठ के मेरे पैरों के पास बैठ कर मेरी पैन्ट उतार दी और लंड देख कर खुश होते हुए बोली मेरी किस्मत भी कितनी अच्छी है जो मुझे जवान मोटा लण्ड मिला है।

आज मेरी जम कर प्यास बुझा दे मेरे राजा। और मेरा लण्ड चूसने लगी। काफी देर तक मेरा लंड चूसने के बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसके मुंह में ही निकाल दिया और वह भी रंडियों की तरह मेरे माल का एक एक बूंद पी गई। अब में उनकी चूत में उंगली करते हुए उनकी पेंटी उतार दी और उनकी चूत चाटने लगा।

फिर आंटी उठी और मेरे लण्ड को फिर चूसने लगी। कुछ देर में मेरा लण्ड अकड़ कर खड़ा हो गया तो भाभी सोफे पर ही अपनी टांग ऊपर करके लेट गई। मैंने भी देर करना ठीक नहीं समझा और लण्ड उनकी चूत पर रगड़ने लगा तो भाभी तड़प उठी और बोली अब डाल भी दे। तभी मैंने एक झटका मारा और मेरा चार इंच लंड उनकी चूत में उतर गया और मैं उनके होंठ चूसने लगा।

जब वो कुछ शांत हुई तो मैंने एक झटका और मारा कि मेरा पूरा लन्ड आंटी की चूत में घुस गया। थोड़ी देर में आंटी भी सामने कमर उठा के झटके मारने लगी और बड़बड़ाने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऐसी चुदाई तो आज तक मेरे पति ने भी नहीं की थी।

आह आज मैंने जिंदगी के सारे सुख पा लिए।और दस मिनट में ही आंटी झड़ गई तो मेरा लण्ड आसानी से अंदर बाहर हो रहा था। कुछ देर बाद मैंने भी अपना माल उनकी चूत में ही निकाल दिया तब तक आंटी एक बार और झड़ गई। फिर हम थोड़ी देर आराम करने के लिए लेट गए।

फिर मैंने भाभी को कहा एक और बार करते हैं लेकिन भाभी ने यह कहकर मना कर दिया कि उसका बेटा तुझे वापस आने वाला है इसलिए हम फिर कभी कर लेंगे। अब तो यह सब कुछ चलता ही रहेगा। फिर मैंने अपने कपड़े पहने और अपने घर की तरफ चल दिया।