देसी औरत की मस्त चूचियां

नमस्कार दोस्तों मैं राजू आज फिर आपके लिए एक नई कहानी लेकर हाजिर हूं। मेरी बचपन से ही सेक्स में बहुत ही ज्यादा रुचि रही है। मैं अक्सर ही हिंदी सेक्स कहानियां ऑनलाइन पढ़ता लिखता हूं आज मैं आपको अपनी कहानी के बारे में बताने जा रहा हूं। एक कहानी बिल्कुल सच्ची है और इसमें रत्ती भर भी झूठ नहीं है।

मैं यूपी के एक छोटे से गांव में रहता हूं। मेरी किराने की दुकान है और गांव मैं बहुत सारी किराने की दुकान होने के कारण बहुत ज्यादा कंपटीशन है। इसलिए हमें कई ग्राहकों को उधार में सामान देना पड़ता है ताकि हमारा ग्राहक बना रहे।

हमारे गांव में एक औरत रहती है जिसका पति दूसरे राज्य जाकर काम करता है और साल में दो-तीन बार ही घर आता है और सिर्फ पंद्रह बीस दिन ही रुकता है और फिर वापस काम के लिए चला जाता है। उस औरत का नाम राज़ी है और वह मुसलमान है।

अच्छा जी वह मेरी दुकान पर सामान लेने के लिए आती है। उसका फिगर बहुत ही कमाल का है और उसका रंग तो दूध जैसा सफेद है। 36 की छाती, 28 की कमर और 34 की गांड देखकर तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।

जब भी वह मेरी दुकान पर सामान लेने आती तो मैं है किसी ना किसी तरह उससे बात करके उससे ज्यादा देर अपनी दुकान पर रखने की कोशिश करता। ताकि मैं उसे थोड़ी बहुत देर तक दे सकूं। जिस दिन में उसको देख लेता था वह दिन मेरा हंसते हंसते गुजर जाता था। अब मैं बस उसके ही ख्यालों में डूबा रहता था और उससे सेक्स करने के सपने देखता रहता था।

एक दिन की बात है वह राशन लेने के लिए मेरी दुकान पर आई। उसने मुझसे बोला मेरे पास आज पैसे नहीं है आप प्लीज मुझे उधार दे दे दीजिए जैसे ही मेरे शौहर शहर से पैसे भेजेंगे मैं आपको आकर दे दूंगी। मैंने कहा कोई बात नहीं मैंने आपसे पैसे कब मांगे भला।

आप समान ले जाइए जब आपके पास पैसे होंगे तब दे जाइएगा कोई चिंता वाली बात नहीं है। इतना कहकर मैंने उसका जो भी समान था उसे दे दिया और एक कॉपी पर उसका उधार लिख लिया। वह सामान लेकर मुझे शुक्रिया कहते हुए मेरी दुकान से अपने घर की तरफ चल पड़ी।

आज उसने टाइट कुर्ती पहन रखी थी जिससे उसके बूब्स काफी टाइट हो रखे थे और एकदम सख्त दिखाई दे रहे थे। जैसे ही वह मुड़कर अपने घर की तरफ जाने लगी उसकी मटकती हुई गांड मैं पीछे से देखने लगा। उसकी वह मटकती हुई गांड देखकर मेरा लन्ड खड़ा हो गया और मैंने बाथरूम में मुठ मारी और वापस अपने काम पर लग गया।

मुझे उसके बूब्स के ऊपर उभरी हुई चूचियां बहुत ही मजेदार लगती थी और मैं इन सूचियों को एक बार चूसना चाहता था। अब इस बात को एक महीना हो गया था और एक महीने से वह लगातार मेरे से उधार ही ले रही थी।

जब लगभग 10,000 का उधार हो गया तो जब वो एक दिन मेरे दुकान पर आई तो मैंने उससे बिठाकर कहा देखो तुम पर बहुत ज्यादा उदार हो गया है और तुमने अभी तक एक भी रुपया नहीं दिया है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो मैंने तुम्हें उधार का समान नहीं दे पाऊंगा।

वह बोली मैं आपकी बात समझती हूं लेकिन मेरे शौहर ने अभी तक मुझे एक भी पैसा नहीं भेजा तो मैं आपका उधार कैसे चुकाऊंगा और ना ही वह 6 महीने से घर आए हैं। इतना कहते हुए रोक वो रोने लगी तो मैंने उसके पीठ को सहलाते हुए उसके हाथ पर हाथ रखकर उसे हौसला दिया और कहा कोई बात नहीं तुम रोओ मत।

फिर उसने मेरे हाथ पकड़ लिया और बोली आपका मेरे पर बहुत है एहसान है मैं आपसे पैसे लौटा दूंगी। मैंने मन ही मन सोचा इसका पति 6 महीने से घर नहीं आया उसको तो चुदने की भी तलब लगी होगी। फिर मैंने दोनों हाथों से उसके हाथ को पकड़ते हुए कहा तुम कल मेरे घर आना मैं तुम्हें एक जगह नौकरी दिलवा दूंगा।

वह मुझे फिर से शुक्रिया करती हुई चली। अगले दिन वो मेरे घर आ गई और उसने मेरे घर का दरवाजा खटखटाया। मैं घर पर अकेला ही था और मैंने उसे अंदर बुलाया और बिठाया।

फिर काफी देर से बातें करने के बाद मैंने उससे कहा मुझे पता है तुम्हें चुदने में की तलब है मैं तुम्हारी प्यास को मिटा दूंगा और बदले में तुम्हारा थोड़ा उधार भी माफ कर दूंगा।

वह कुछ नहीं बोली और अपना सिर नीचे करके बैठ गई। मैं समझ गया इसकी चुप्पी का मतलब हां ही है। फिर मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके होठों को चूमने लगा और उसके रसीले होठों का रस पीने लगा।

फिर वह भी मेरा साथ देने लगी और उसने मेरी पैंट की ज़िप खोली और मेरा लन्ड निकाल कर ले मुंह में ले लिया। फिर मैंने उसके कपड़े उतारे और उसकी चूचियों के दर्शन किए जिसके लिए मैं पागल हो रहा था।

फिर मैंने उसका एक पूरा मम्मा अपने मुंह में घुसा लिया और उसे चूसने लगा।

ऐसा ही मैं और उसके दोनों बूब्स और चूचियों के साथ कर रहा था। तो मैं उसकी चुचियों के ऊपर अपने लन्ड को फेरने लगा।

और एक हाथ से उसकी चुत में उंगली करने लगा। वह सिसकियां भरने लगी।

फिर मैंने अपना लन्ड उसकी चुत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। कुछ बहुत दिन से वह चूदी नहीं थी इसलिए उसकी चुत टाइट हो गई थी जिस कारण जैसे ही मेरा लंड उसके अंदर घुसा वह दर्द के मारे चिल्ला उठी।

लेकिन मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और तेजी से उसकी चुदाई करने लगा। उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे लेकिन मैंने उनकी परवाह किए बगैर उसे लगातार चोदता रहा।

थोड़ी देर में वो झड़ गई और उसके बाद उसे थोड़ा आराम मिला और अब उसकी चुत में मेरा लन्ड आराम से ऊपर नीचे हो रहा था।

से काफी देर चोदने के बाद मैंने अपना लन्ड उसकी चुत से निकाला और एकदम से लंड उसकी गांड में घुसा दिया और उसे फिर तेजी से जोड़ने लगा।

फिर थोड़ा चिल्लाई लेकिन थोड़ी देर बाद वह भी गांड को जोर जोर से धकेल कर चुदाई के मजे लेने लगी।

काफी देर उसे चोदने के बाद मैंने सारा माल उसकी गांड के अंदर ही निकाल दिया।

इस तरह मैंने उस दिन चुदाई का भरपूर मजा लिया और राजी की तलब को भी शांत किया।

उस दिन के बाद राजे को जब भी किसी चीज की जरूरत पड़ती तो वह मेरी दुकान से ले जाती और बदले में कभी अपनी चुत तो कभी अपनी गांड मरवा कर पैसे चुका देती।