दिल्ली वाली भाभी का रंडीपना – 1

नमस्ते दोस्तों मै आपका दोस्त आज एक कहानी ले कर आया हूँ जो की मेरे साथ में घटी थी. यह कहानी बिलकुल सच्ची है जो मेरे और मेरे दूर की भाभी की चुदाई की है. इस कहानी में आप जानेगे की कैसे मैने भाभी की चुत और गांड दोनों मारी. तो चलिए जल्दी से शुरू करते है.

मेरा नाम अमित है यह कहानी आज से तीन साल पहले की है जब मेरी उम्र २१ साल थी और भाभी की उम्र उस समय २८ साल . भईया और भाभी की शादी को 5 साल हो गए थे और उनकी ३ साल की बेटी भी थी. भईया और भाभी दोनों दिल्ली मे किराये के फ्लैट में रहते थे . भईया जॉब की वजह से ज्यादा तर टूर पे ही रहते थे. तो वह भाभी को ज्यादा टाइम नहीं दे पाते थे जिस से भाभी काफी अकेली फील करती थी, यह बात मुझे बाद में पता चली थी.

मै अपने परिवार के साथ लखनऊ मे रहता था, मेरे पापा एक बिजनेसमैन है. एक बार पापा बिज़नेस के काम के वजह से दिल्ली जाने वाले थे पर एक दिन पहले ही पापा की तबियत ख़राब हो गई और उनके बदले मुझे दिल्ली जाना पड़ा. तो मम्मी ने भईया से बात कर ली के मै उनके फ्लैट पे ही रुकुंगा.

फिर मै अपना सामान पैक करके ट्रैन से दिल्ली पहुंच गया. भईया मुझे लेने स्टेशन आए थे. उनकी शादी के बाद मै आज उन से पहली बार मिल रहा था। फिर हम सीधे उनके फ्लैट पे चले गए. आज मै भाभी से भी उनकी शादी के बाद पहली बार मिल रहा था. पहली और आखरी बार भाभी को उनकी शादी में ही देखा था. और सच बोलू तो उनको देखते ही मेरे लंड ने मुझे बोल दिया था की मुझे इसकी चुत मे घुसना ही है. फिर जब हम फ्लैट पे पहुंचे तो भाभी ने ही गेट खोला.

भाभी को देखते ही मेरा तो मानो जैसे दिमांग ही ख़राब हो गया हो. भाभी बिलकुल ही बदल गई थी. अब उनका फिगर और भी ज्यादा सेक्सी हो गया था. ३४ के चूचिया ३० की कमर और ३७ की उनकी गांड , दूध से भी गोरा उनका रंग और घने लम्बे बाल. उस टाइम भाभी ने लोअर टीशर्ट पहना था इस ड्रेस में वह कमाल की लग रही थी.

मुझे माफ़ करना में भाभी और भईया का नाम तो बताना ही भूल गया – भईया का नाम रोहित है और मेरी भाभी का नाम रेखा.

फ्लैट पे पहुंच कर मेने जल्दी अपना सामान रखा और हाथ मुँह धो कर पापा के बिज़नेस के काम से बाहर चला गया. फिर शाम को में करीब ८ बजे सारा काम ख़तम करके जल्दी से वापस आ गया क्युकि सारा दिन मै सिर्फ भाभी के बारे में ही सोच रहा था.

जब मै फ्लैट पे आया तो भाभी ने ही गेट खोला उनको देखते ही एक बार फिर से मुझे उनसे प्यार हो गया. भाभी ने अब अपने सेक्सी बदन पर साड़ी डाल रखी थी. उन्होंने मुझे देखते एक बहुत ही प्यारी सी स्माइल की और मै उनको देखता रह गया.

भाभी:- अमित गेट पे ही खड़े रहने का इरादा है क्या ?? अंदर आओ.
मै :- नहीं भाभी बस आपकी खूबसूरती में खो गया था.
(इस बात पे भाभी शर्मा गई.)

भाभी:- चलो अब जल्दी से अंदर आओ.
मै :- भाभी भईया कहा है दिख नहीं रहे ???

भाभी:-हां वह भईया का फ़ोन आया था उनको ऑफिस के काम से जयपुर जाना पड़ा है तो वह ऑफिस से ही चले गए है वह २ दिन बाद आएंगे. तुम सोफे पे बैठो मै तुम्हारे लिए चाय ले कर आती हूँ.

फिर मै वही सोफे पर बैठ गया और भाभी अपनी गांड को मटकाते हुए किचन मे चली गयी. उनकी गांड का तो मै दीवाना हो गया था. भाभी की गांड को देख मेरे लंड मे हलचल शुरू हो गयी थी.

मेने उसी टाइम सोच लिया था की आज तो भाभी की गांड मे अपना लंड जरूर डाल कर ही रहूँगा. थोड़ी देर बाद भाभी चाय ले कर आई और आते आते पता नहीं क्या हुआ भाभी ने चाय मेरे पैंट पे गिरा दी.

भाभी :-सॉरी सॉरी अमित मुझे माफ़ कर दो मुझसे गलती से चाय गिर गई.

मै :- भाभी कोई बात नहीं.

भाभी:- अमित तुम जल्दी से बाथरूम मे जा कर अपनी पैंट चेंज करलो.

मै फिर बाथरूम चला गया. बाथरूम मे पैंट चेंज करते करते मेरे दिमांग मे बस यही बात चल रही थी की क्या भाभी ने यह जान मुझ कर किया है या सच मे उनसे चाय गलती से गिर गई. थोड़ी देर बाद मै बाथरूम से चेंज करके निकला तो भाभी बाहर ही खाड़ी थी। उनके हाथ मे एक क्रीम थी.

भाभी:- ज्यादा तो नहीं जल रहा न अमित लाओ मै दवाई लगा देती हूँ.
(मैने भी नाटक करते हुए मना करने लगा पर मन में तो कुछ और ही चल रहा था.)
मै:- नहीं भाभी मै ठीक हूँ.
भाभी:- अमित मुझ से शर्मा क्यों रहे हो मै तो तुम्हारी भाभी ही हूँ . दिखाओ कितना जला है.

जब वह यह बात बोल रही थी तब मैने उनके चेहरे की तरफ देखा तो मुझे उनके चेहरे के भाव से लगा की भाभी को अफ़सोस कम और किसी और बात की खुशी ज्यादा है. मुझे थोड़ा थोड़ा अब समझ आने लगा था की आग दोनों तरफ बराबर है. पर में एक बार कन्फर्म होना चाहता था , मै बस एक बार भाभी के ग्रीन सिगनल का वेट कर रहा था.

भाभी:- अमित तुम लेट जाओ मै दवाई लगा देती हूँ.
मै :- ठीक है भाभी.
(अपनी लोअर निकाल कर मै बेड पे लेट लाता हूँ , अब मै सिर्फ अंडरवियर मे था। फिर भाभी ने दवाई लगानी शुरू कर दी.)

जैसे ही भाभी ने उनके नाजुक हाथ से मुझे छुआ मेरे शरीर मे तो मानो करेंट सा लग गया और कुछ देर मे मेरा लंड भी खड़ा होने लग गया जिसे देख कर भाभी स्माइल करने लगी.

भाभी :- अमित तुम्हारा अंडरवियर भी उतार दो मुझे दवाई अच्छे से नहीं लगाई जा रही है.

भाभी की यह बात सुन कर मुझे जो चाहिए था (ग्रीन सिग्नल) वह मुझे मिल चूका था . मेने जल्दी से अपना अंडरवियर भी उतार दिया. मेरा लंड देखते ही भाभी की आँखे चमक उठी.

भाभी :- अमित तुम्हारा यह तो खड़ा हो गया है.
मै :- क्या भाभी ?? (मेने नादान बनकर पूछा.)
भाभी :- यही तुम्हारा लंड (यह बोलते ही भाभी ने मेरा लंड पकड़ लिया.)

मै तो अभी तक भाभी को छोटी मोटी रंडी समझ रहा था पर अब मुझे लगने लगा था की भाभी बहुत बड़ी वाली रंडी है.

भाभी:- देवर जी आपका यह लंड तो बहुत बड़ा और मोटा है.
मै :- तो क्या इरादा है भाभी ??
भाभी:- इरादे तो कुछ अच्छे नहीं है.

(यह बाते करते हुए भाभी मेरे लंड को अपने कोमल कोमल हाथो से हिला रही थी.)

मै :- क्या बात है भाभी आप तो बहुत तेज निकली ??
भाभी :- अभी तुमने मेरी तेजी देखी कहा है.

मै:- तो देर किस बात की है जल्दी से शुरू हो जाओ भाभी और इस लंड को जल्दी से अपने मुँह मे लेकर चुसो.

(फिर भाभी मेरे लंड पे एसे झपटती है जैसे मानो जन्मो से भूखी हो.)

भाभी :- वाह देवर जी क्या लंड है तुम्हारा मज़ा आ गया आज. बहुत दिनों बाद एसा लंड चूसने को मिला है। मै तो आज इसे छोड़ूगी नहीं.
मै :- हा भाभी यह लंड अब बस आपका ही है जो करना है करो.

(मेरे मुँह से अब आवाजे निकलने लगी थी.)

मै :- आह आह आह भाभी , क्या बात है भाभी आह आह अहा
(अब मेरा लंड पूरा तैयार हो चूका था.)

भाभी :- अमित अब मुझे से कंट्रोल नहीं होता मेरी चुत मे आग लगी है अब जल्दी से अपना लंड मेरी चुत मे डाल दो और बना लो मुझे अपनी रंडी.

भाभी यह बात बोलते बोलते अपने सारे कपड़े उतार देती है और पूरी नंगी हो जाती है. मै भी बिना टाइम बर्बाद किये भाभी को बिस्तर पे खींच लेता हूँ. और भाभी के चूचियों से खेलने लगता हूँ. अपना लंड धीरे धीरे उनकी चुत पे घिसने लगता हूँ.

भाभी :- अमित अब बस मुझसे और बर्दास्त नहीं होगा प्लीज मुझे चोदो.
मै :- ठीक है भाभी पर आपको मुझे एक वादा करना होगा की आप मुझे आपकी गांड भी मारने दोगी.
भाभी:- हां हां जो मर्जी चाहे कर लेना बस अब मुझे जल्दी से चोदो वर्ना मे पागल हो जा उगी.

फिर मैने अपना लंड भाभी की चुत पे सेट किया और एक ही बार मे पूरा लंड भाभी की चुत मे उतार दिया.

भाभी :- आआआआआ मर गई साले यह क्या किया तूने आआआआ माधरचोद यह कोई रंडी की चुत नहीं है आआआ जो एसे चोद रहा है जल्दी बहार निकालो मुझे बहुत दर्द हो रहा है.

मेने भाभी की बात पे ध्यान नहीं दिया और अपना लंड अंदर बहार करता रहा. थोड़ी देर बाद भाभी का दर्द कम हो गया और उनको भी मज़ा आने लगा।

भाभी:- आह आह अहह अहह मज़ा आरहा अमित प्लीज चोदो मुझे और जोर से चोदो आह आह अहह अहह और जोर से.
मै :- हां भाभी लो और लो कसम से भाभी आपकी चुत तो बहुत गरम है आह अहह.
भाभी:- तो चोद चोद कर इसे ठंडा कर दो देवर जी। आज कितने दिनों के बाद मुझे एसा लंड मिला है.

(भाभी की यह बात सुन कर मै समझ चूका था की भाभी और भी लोगो से चुद चुकी है. लगभग २० मिनट भाभी की चुत मारने के बाद मेरा निकलने वाला था.)

मै :- आह आह अहह अहह भाभी मेरे निकलने वाला है कहा निकालू.
भाभी:- मेरे अंदर निकल दो देवर जी मेरी चुत को अपने सफ़ेद लावे से भर दो अहह अहह.

फिर मेने अपनी चोदने की रफ़्तार और तेज कर दी फिर ८ – १० धको के बाद मेरा लावा भाभी की चुत मे ही निकल गया. भाभी जल्दी से उठी और बाथरूम चली गई और खुद को साफ़ कर के बहार आकर मेरे बगल मे लेट कर मेरे लंड को चाट चाट कर साफ़ कर दिया.

अभी के लिए बस इतना ही अगले पार्ट मे बताउगा की कैसे मेने भाभी की गांड मारी और उन्हें अपना मुठ भी पिलाया और भाभी ने कैसे मुझे उनके कई सरे चुदाई के किस्से बताये.

धन्यवाद..