झगड़ालू चाची को रंडियों की तरह चोद डाला

हेलो दोस्तों, हिंदी सेक्शुअल स्टोरीज की वेबसाइट पर आपका स्वागत है। मेरा नाम सलमान है और मैं पुणे मैं हैदराबाद में रहता हूं। मैं दिखने में हट्टा कट्टा हूं और किसी पहलवान से कम नहीं हूं। मेरा लन्ड भी काफी बड़ा है और काफी मोटा दी है।

अभी तक मैं दो चार रंडियों को चोद चुका हूं लेकिन अभी तक किसी को बिना पैसे देकर चुदाई नहीं की। पहले हमारा एक संयुक्त परिवार था और हमारे परिवार में करीब 12 लोग रहते थे। लेकिन अब मेरे और मेरे चाचा के परिवार में बटवारा हो गया है और अब हम दोनों परिवार अलग अलग रहते हैं।

मेरी चाचा कि 5 साल पहले ही शादी हुई थी तब हम इकट्ठे रहा करते थे। लेकिन चाचा की शादी के 2 साल बाद से ही चाची ने अपने नखरे दिखाने शुरू कर दिए और घर में लड़ाई लगवा दी इसलिए हमें अलग होना पड़ा। अब मैं सोच ही रहा था कि चाची से बदला कैसे लिया जाए।

मैंने नोटिस किया था कि एक दो बार चाची मुझे लाइन जरूर देती थी। लेकिन मैं उम्र से थोड़ी नफरत करता था इसलिए मैंने कभी भी पलट कर उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन अब लॉकडाउन लग गया था और करीबन 6 महीने हो गए थे चुदाई के मजे लिए।

अब तो रंडी बाजार भी बंद था कि मैं अपनी चुदाई की प्यास वहां जाकर बुझा सकूं। फिर क्या था मैंने अपने मोहल्ले में ही शिकार ढूंढना शुरू कर दिया। तभी अचानक शाम के समय मैं अपनी छत पर टहल रहा था और तभी मैंने देखा की चाची भी छत पर चढ़ी हुई है और इधर उधर टहल रही है।

फिर चाची ने मेरी और देखना शुरू कर दिया और अपने होंठों पर जीभ फेरने लगी। मुझे लगा जैसे चाची मुझे निरुता दे रही है कि आओ और मेरी चुत मार लो। लेकिन मैंने भी इतनी आसानी से तैयार होने वालों में से नहीं था। मैंने भी उनकी तरफ देखना बंद कर दिया और इधर-उधर देखने लगा।

तभी चाची ने आवाज लगाई अरे ओ सलमान कितने दिन हो गए तुम्हारे घर नहीं आता कभी भी। हालांकि हम दोनों परिवार अलग अलग हो गए थे लेकिन अब भी हम एक दूसरे के घर कभी-कभी चले जाते थे। और अगर कोई त्यौहार वगेरह होता था तो हम लोग इकट्ठे ही मनाते थे।

अब क्योंकि चाची ने मुझे आवाज लगा दी थी इसलिए मुझे उनकी बात का जवाब देना है पड़ना था। इसलिए मैंने चाची को कहा बस ऐसे ही कोई काम वगैरह नहीं होता तो मैं नहीं आता। फिर चाची ने कहा हमारे घर भी तुम तभी आओगे जब तुम्हें कोई काम पड़ेगा।

चाची की यह बात सुनकर चुप कर गया क्योंकि मेरे पास उनको देने के लिए कोई जवाब नहीं था। फिर चाची ने मुझे कहा तुम कल हमारे घर दोपहर के खाने पर आ जाना मैं तुम्हें न्योता दे रही हूं। अलग जरूर हो गए हैं लेकिन हमारा आपसी प्यार थोड़ी ना खत्म हो गया है।

हम लोग जितना मर्जी अलग हो जाएं लेकिन अपने तो अपने ही होते हैं ना। मैंने चाची को कहा ठीक है मैं कल दोपहर को आ जाऊंगा आप सब कुछ बनाकर तैयार रखना। फिर भी यह बात जाकर मैंने अपने घरवालों को बताई तो उन्होंने कहा अरे तुम्हारी चाची को आज तुम्हारी याद कैसे आ गई।

पक्का उसे कोई ना कोई काम होगा इसलिए वो तुम्हे खाने पर बुला रही है। मैंने कहा कोई बात नहीं जाकर देखते है कि उसे क्या ही काम होगा। फिर मैं अगले दिन दोपहर लंच के टाइम चाची के घर चला गया और जैसे ही मैं घर के अंदर गया तो मैंने देखा घर पर चाची अकेली है और सोफे पर बैठी हुई है।

मैंने चाची से कहा लो मैं आ गया आप कहते थे हमारे घर नहीं आता तू सलमान। अब आप बताइए खाना तैयार है कि नहीं मुझे बड़ी जोरों की भूख लगी हुई है। तो चाची ने बड़े ही शरारती अंदाज में कहा कोई बात नहीं मैं तुम्हारी भूख भी मिटा दूंगी और तुम्हारी प्यास भी तुम थोड़ा सब्र तो करो।

मैंने चाची की ख्वाहिश पहले से ही जानता था ना इसलिए मैंने कहा चाची प्यार तो आपको भी बहुत है चलो आज एक दूसरे की प्यास बुझा देते हैं। इतना सुनते ही चाची मुझसे आकर लिपट गई और मेरे होठों को चूमने लगी।

मैं भी उनके नरम नरम होंठों के रस को पीने लगा हूं अपनी जीभ उनकी जीभ से मिलाने लगा। फिर मैंने उन्हें अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाकर बेड पर पटक दिया।

मैंने सोच लिया था कि इतना सारा गुस्सा और हवस और चाची पर निकाल दूंगा। फिर मैंने चाची के कपड़े उतारे और उनके बूब्स को जोर जोर से मसलने लगा और उन्हें चूसने लगा।

चाची बोले जा रही थी कि धीरे करो लेकिन मैं किसी बौखलाए कुत्ते की तरह सब कुछ कर रहा था।

फिर मैंने चाची को उल्टा लेटाया और उनको कुत्तिया बनाते हुए अपना लन्ड पीछे से उनकी चुत पर रखा है और एक ही झटके में पूरा लन्ड उनकी चुत के अंदर कर दिया।

मैंने दोनों हाथ से उनके दोनों बूब्स पकड़ लिए और लंड अंदर बाहर करने लगा। वह दर्द के मारे जाने लगी और बोली सामान धीरे से करो तुम्हारी चाचाजान ने कभी इतनी जोर से नहीं किया।

उनकी गांड पर एक जोर से थप्पड़ मारते हुए कहा अरे उन्होंने नहीं किया तो क्या हुआ मैं कर रहा हूं ना।

थोड़ी ही देर में वो झड़ गई और अब क्योंकि उसका पानी निकल चुका था इसलिए लंड अब आसानी से अंदर बाहर हो रहा था और वह भी मजे लेने लगी थी।

फिर मैंने उसको एक तरफ लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ा करते हुए की चुत में लंड डाला और और जोर जोर से झटके देने लगा। वो एक बार फिर से वो झड़ गई।

चुदाई करते करते अब पंद्रह मिनट हो गए थे और में भी झड़ने वाला था तो मैंने अपना लन्ड चाची के मुंह में डाल दिया और उसे चूसने को बोला।

वो बोली ऐसा मैंने पहले कभी भी नहीं किया है। तो मैंने कहा कि आज कर लो।

तो मैं उसके मुंह की चुदाई करने लगा और वो भी मेरे लन्ड को बड़े ही प्यार से चूसने लगी। फिर मैंने एक जोरदार शॉट मारा और अपना सारा माल उसके मुंह के अंदर ही निकाल दिया।

वह खांसते हुए मेरा सारा धीरे धीरे निगलने लगी और कुछ माल उसके मुंह से लार के रूप में टपकने लगा और उसकी चुचियों पर गिर गया।

इस तरह उस दिन मैंने उसको पूरा रंडियों की तरह चोदा और उस दिन के बाद तो मैं उसे कई बार चोद कर अपना बदला पूरा कर चुका हूं।