चाची के लटके बूब्स के दीवाने ने चाची को चोदा

गर्मियों की छुट्टियां पड़ी हुई थी और मैं घूमने के लिए अपने गांव चला गया था। गांव में चाचा चाची रहते थे। मेरे चाचा जी मुझे हमेशा कहते थे कि तू घूमने के लिए नहीं आता कभी तो आकर हमारा घर भी देख ले।

तो फिर चाचा जी के बुलाने पर मैं उनके घर जा पहुंचा। वहां मैंने चाची को बहुत दिनों के बाद देखा। चाची एक मस्त फिगर वाली औरत थी। चाची की कमर बहुत ही पतली थी और वह बहुत फिट नजर आ रही थी।

उनकी गांड भी थोड़ी सी उभरी हुई थी और देखने में बहुत ही मस्त लग रही थी। चाची के बूब्स भी ठीक-ठाक है और उन में दूध कूट-कूट कर भरा था। जब मैं वहां गया तो मैंने पूरा गांव घुमा और काफी सारे लोगों से मिला। रात को जब हम खाना खाने लगे तो चाची खाना परोस रही थी।

मैंने चाची के बूब्स की तरफ देखा तो वह बहुत ही मस्त लग रहे थे। चाची मुंब्रा नहीं पहनी हुई थी और सिर्फ ब्लाउज के ऊपर से ही सारी पहनी हुई थी। ब्लाउज में से उनकी मम्मी थोड़े लटके हुए दिखाई दे रहे थे। मुझे लटके हुए मम्मी देखकर कसम से मेरा लौड़ा एकदम से खड़ा हो गया।

वैसे मैं बताना भूल गया कि मेरा लौड़ा बहुत लंबा और मोटा है। मैं अब तक काफी लड़कियों और औरतों की चुत फाड़ चुका है। और चाची को देखकर ऐसे खड़ा हो गया जैसे अब यह चाची को चोदे बिना मानेगा नहीं। फिर हम सभी ने मिलकर खाना खाया और सोने के लिए चले गए।

घर में दो कमरे थे लेकिन एक कमरे का पंखा खराब होने के कारण हम तीनों एक ही कमरे में सोने चले गए। कमरे में एक डबल बेड था चाचा चाची एक तरफ सो गए और मैं दूसरी तरफ सो गया। मै और चाचा साइड में सोए हुए थे और चाची बीच में सोई हुई थी।

मुझे नींद नहीं आ रही थी वह मैं बस चाची के बारे में भी सोचे जा रहा था। रात के 12:00 बजे सीक्रेट है और चाचा चाची दोनों गहरी नींद में सो रहे थे। तभी मैंने पलट के चाची को देखा तो चाची सोते हुए बहुत ही प्यारी लग रही थी और उसके मन में तो गजब लग रहे थे। मेरा मन उनके बूब्स को छूने का कर रहा था। मैंने पूछ मत छुपा कर उनसे बूब्स पर अपना हाथ रख दिया और सोने की एक्टिंग करने लगा।

लेकिन तभी चाची की मेल अचानक से खुल गई और उन्होंने मेरा हाथ अपने बूब्स के ऊपर से हटाने की बजाय मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया। मैं समझ गया कि चाची ने हामी भर दी है। मुझे पता था की चाची को शहरी लड़के बहुत पसंद है और वह हमेशा से शहर में रहना चाहती थी।

इतना सोचते सोचते पता ही नहीं चला कि कब मेरी आंख लग गई और मैं सो गया। अगले दिन जब मैं सुबह उठा तो चाचा चाची उठ चुके थे और वह अपना अपना काम कर रहे थे। मैं नहाने के लिए बाथरूम गया तो नहाते वक्त चाची की आंघी को बाथरूम में देखा और मैं मुट्ठी मारने लगा और अपना सारा माल बुझानी पड़ निकाल दिया और उसे एक कोने में फेंक दिया।

मैं नहा कर बाहर निकला और कपड़े वगैरह पहने। दोपहर को चाचा जी कहीं बाहर चले गए और उन्हें रात को आना था। चाची ने बाथरूम में जाकर यह देख लिया कि उनकी आंघि पर मैंने अपना सारा माल निकाला हुआ है। चाची समझ गई की है चुत मार देना मानेगा नहीं।

शाम को चाय पीते वक्त मैंने चाची से पूछा कि मैं आपको कैसा लगता हूं। तो चाची ने कहा कि तुम मुझे अच्छे लगते हो और पसंद भी हो। फिर चाची ने कहा कि तुमने रात को जानबूझकर हाथ रखा था ना। मैंने कहां हो आप बहुत कमाल की लग रही थी उस वक्त। चाची ने कहा तो फिर सो क्यों गए आगे भी कुछ करना था ना।

इतना सुनते ही मैंने चाची को कहा उस वक्त नहीं कर पाए तो क्या अब कर लेते हैं। चाची और मैं दोनों बेडरूम में चले गए। मैंने चाची की साड़ी खींच कर उतार दी और अपने सारे कपड़े 1 मिनट के अंदर उतार दिए। मैंने चाची का ब्लाउज उतारा और उनके बूब्स को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा।

मुझे चाची में सबसे अच्छे उनके बूब्स ही लगते थे और मैं उन्हें ही काफी देर तक एक-एक करके चूसता रहा। मैंने चाची के दोनों को उसको एक साथ पकड़ा और दोनों बूब्स के बीच में से अपना लंड उपर नीचे करने लगा। चाची भी कहने लगी कि ये कौन सी नई तकनीक है जिसका मुझे नहीं पता।

मैंने कहा चाची आपके शरीर का सबसे खूबसूरत हिस्सा मैं आपके ग्रुप से ही है। कल रात को आपके लिए लटके हुए बूब्स देखकर मैं मदहोश हो गया था। चाची ने कहा कोई बात नहीं मिटा लो अपनी सारी हवस मेरे बूब्स पर। फिर मैंने चाची को बोला क्या आप चुुदने के लिए तैयार है।

चाची ने कहा तेरा लौड़ा बहुत बड़ा और मोटा है आज इस लोड़े का अभी मैं पूरा मजा लूंगी। चाची ने अपनी टांगे फैला दी और मुझे कुछ ज्यादा नहीं करना पड़ा और मैंने अपना लन्ड चाची की चुत पर रखा और एक झटका दिया। फिर मैंने जोर से एक और झटका दिया और अपना पूरा लौड़ा चाची की चुत के अंदर तक घुसा दिया।

फिर क्या था चाची रोमांटिक आवाजें निकालने लगी और मुझे कहने लगी है और जोर से चोदो, आज मेरी सारी हवस मिटा दो, मुझे जन्नत की सैर करा दो। चाची की यह कामुकता भरी बातें सुनकर मैं और जोर-जोर से उन्हें चोदने लगा। चोदते चोदते मैं चाची की चूचियां भी चूसने लगा।

चाची और मदहोश हो गई और इधर-उधर डोलने लगी। चाची को ऐसा करते देख मुझे पता चल गया कि चाची अब झड़ने वाली है। मैंने चुदाई की स्पीड और ज्यादा बढ़ा दो और उन्हें बेतहाशा चोदने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने अपना लन्ड उनकी चुत से बाहर निकाला और सारा माल उनके बूब्स पर निकाल दिया जो मुझे बहुत पसंद है। इस तरह मैंने चाची को चोदने का सपना पूरा कर लिया। चाची भी अब भारी भारी सांसे ले रही थी और मैं भी कुत्तों की तरह हाफ रहा था। इस तरह उस शाम हमने चाय के बाद सेक्स का भरपूर आनंद लिया।

रात को चाचा आए तो हम लोगों ने खाना खाया और क्योंकि पंखा ठीक हो चुका था तो अपने कमरे में मैं अलग सोने चला गया। मैं हूं वहां गांव में एक हफ्ता और उसका और इस बीच मुझे चाची को एक बार और चोदने का आनंद मिल गया।

इस बार मैंने चाची की गांड मारी और अपना सारा मां उसकी गांड में ही निकाल दिया था। अब छुट्टियां खत्म हो गई है और मैं घर वापस जाने की तैयारी कर रहा हूं। गांव में बिताए खूबसूरत पल शहर जाकर याद आएंगे।