रिक्शे में भाभी के बगल की पसीने की महक ली दिहाड़ी मजदुर ने

पसीने से लथपथ हुई सुमन भाभी ने साडी के पल्लू से अपने मस्तक को पोंछ लिया. सामने आती हुई रिक्शा को हाथ दिखा के वो एक बार फिर से निराश हुई. ये चौथी खाली रिक्शा थी जो भाभी के लिए रुकी नहीं. मुहं पर कोरोना के लिए मास्क भी डाला हुआ था जो उसकी बेताबी को और घोंट रहा था.

सामने क्षितिज पर एक और यलो और ग्रीन आकृति दिखी. सुमन भाभी ने हाथ को मन ही मन रेडी कर लिया, जैसे की सोच रही हो की इसे तो दूर से ही हाथ दिखाती हूँ ताकि वो रुके.

और उसने दूर से ही रिक्शे को हाथ खड़ा कर के दिखाया.

और उसकी महनत आखिरकार रंग लाइ थी. रिक्शा रुकी. लेकिन सुमन भाभी उतनी खुश नहीं हुई जितनी निराश हुई. रिक्शे में पहले से ही दो लोग बैठे हुए थे. दोनों कोई दिहाड़ी मजदूरों के जैसे थे जिनके कपडे मिट्टी से सने हुए थे. एक दो सेकंड के अंदर ही भाभी के दिमाग में ना जाने कितने ही ख़याल आ गए. वो सोच रही थी इसमें बैठूं की नहीं? अगर ये रिक्शा गया तो फिर दुसरे के रुकने के चांस कितने हैं? पति को भी ऑफिस से आने में अभी वक्त था, ऐसे में कितनी देर वो मार्किट के सामने इस सडक पर खड़ी रह सकती थी.

रिक्शेवाले ने भाभी के सामने ऐसे देखा की मन ही मन सोच रहा हो की चलो आना हैं तो आओ जल्दी वरना भाड़ में जाओ!

भाभी ने भी सोचा की चलो चढ़ ही जाती हूँ रिक्शे में.

दो दिहाड़ी मजदुर में जो भाभी के बगल में कुछ सेकण्ड में आने वाला था वो एक 20-22 साल का लड़का था. और उसकी आँखे भाभी को ही स्कैन कर रही थी कब से. उसकी आँखों में एक अनोखी चमक सी थी. भाभी ने भी उन हरामी आँखों को देखा. मन ही मन उसने सोचा कुछ लेकिन फिर बिना तवज्जो दिये वो अपनी सब्जी की थैली को रिक्शे में रख के बैठ गई.

भाभी की गांड का स्पर्श इस जवान लड़के को हुआ. भाभी की सॉफ्ट सॉफ्ट गांड का वो स्पर्श इस दिहाड़ी के मन में ऊपर से निचे तक जैसे एक सेक्स की लहर दौड़ा गया.

भाभी ने रिक्शे के अंदर ही अपनेआप को इस लड़के से थोडा दूर करने के लिए प्रयास किया. तभी रिक्शेवाले ने दौड़ सी लगा दी. भाभी जो दूर होना चाहती थी वो झटके के साथ इस लड़के के पास सी आ गई और ना चाहते हुए भी इस लड़के के हाथ भाभी के दूध से भरे हुए बूब्स से टच हो गये.

ये सब हुआ था रिक्शे की गलती से लेकिन भाभी ने इस लड़के को दूर होते हुए ऐसे देखा की जैसे कह रही हो साले हरामी तेरे गंदे हाथ से टच कैसे किया मेरे बूब्स को!

लड़का सहला सा भले ही लग रहा था लेकिन मन ही मन वो खुद को जैसे कह रहा था की आज इस चुन्चो को स्पर्श करने की बात को याद कर के मुठ मार लूँगा.

लेकिन अभी कुछ और भी था जो उसके लंड हिलाने के अवसर को और भी सुखद भी बनानेवाला था. सुमन भाभी ने एक बार तिरछी नजर से देखा तो उसके और इस लड़के के बिच में कोई फासला नहीं था. उसकी जांघे इस लड़के की जांघो से घिस रही थी. बदन सटे होने की वजह से भाभी की मखमली जांघो का अहसास इस लड़के को रिक्शा के चलने के हर धक्के पर हो रहा था.

लड़के का लंड खड़ा हो के पेंट से बाहर आने को फडफड़ा रहा था. उसकी चड्डी भी फटी हुई थी पेंट के अंदर! भाभी की साडी पर सीमेंट की गंदगी भी चिपक रही थी इस लड़के के कपड़ों से.

और अब इस लड़के की नाक को एक तीखी और तीव्र सी स्मेल आई. ये स्मेल भाभी की बगल से आई जब रिक्शा के धक्के से एक थैली साइड में हुई. और पहले अहसास में ही जैसे ये लड़का इस गंध का दीवाना हो गया.

लड़के ने भाभी की तरफ देखे बिना ही इस सुगंध को जोर से नाक में खिंचा. और उसकी आँखों के सामने ब्लू फिल्म्स में देखी हुई झांटे आकार बनाने लगी थी.

अभी पिछले हफ्ते ही इन लोगों ने एक नयी ब्ल्यू फ्लिम डाउनलोड की थी अपने जियो फोन पर जिसे सबने देख के बाथरूम को पूरा वीर्य वाला कर दिया था. इस मूवी में भी एक झांटदार बुर थी. और वहीँ बुर के ख़याल इस लड़के के मन में उपसने लगे. लड़के को अपने हाथ काम करते हुए दुसरें लोगों से पता था की औरत की बगल और बुर की खुसबू करीबन एक जैसी ही होती हैं. तो लड़का बगल की गंध को बुर की गंध से कम्पेर कर रहा था.

उसके लौड़े में अजीब तिलमिलाहट सी थी और ये सेक्स के सैलाब से बेखबर भाभी ये मेक स्योर कर रही थी की उसके कपडे इस लड़के के कपड़ों से और गंदे ना हो.

लड़के की आँखे बार बार बंद हो रही थी और मूवी में देखे हुए वो हॉट सिन उसकी आँखों के सामने ताजा हो रहे हैं. मन ही मन में वो सोच रहा था की इस भाभी को बिलकुल वैसे ही कुतिया बना के अपना लंड उसकी चूत और गांड में डालेगा तो कितनी मजा आएगी!

और तभी भाभी का स्टॉप आया गया. उसने रिक्शेवाले को रुकने को बोला. लड़के का तो जैसे दिल ही टूट गया. वो एकदम दयाभरी निगाहों से भाभी को देखने लगा. उसके मन में था की भाभी एकाद मिनिट और रूकती तो उसकी बगल की सुगंध को और ले लेटा दिमाग में.

और इधर भाभी सोच रही थी की अच्छा हुआ की रिक्शा जल्दी यहाँ पहुंचा नहीं तो ये लड़के के कपड़ों से उसकी साडी गन्दी हो जाती.

भाभी थैली वगेरह ले के अपने घर की तरफ चल दी. और रिक्शेवाले ने भी पहले गियर में रिक्शा डाल के चालु कर दिया.

लड़के ने पहले तिरछी नजर से भाभी की साडी में उछ्तली हुई गांड को देखा और फिर अपने होंठो के ऊपर जबान को फेर दिया जो एकदमs सूख चुके थे.

लड़के की तरफ उसकी बगल में बैठे हुए आदमी ने देखा और आँखों से ही पूछा की बबलू का भवा?

और आँख मार के इशारा किया की भाभी अच्छी लगी क्या.

तब तो इस लड़के ने सिर्फ हंस के बात को निपटा दी. लेकिन उसके दिमाग में घर पर पहुँच के भाभी के नाम की मुठ मारने के खुराफाती आइडिया ने जन्म ले लिया था. भाभी के बगल की खुसबू अभी भी उसके जहन में चिपकी हुई थी!