आंटी को बस में चोदा

हेलो दोस्तों मेरा नाम राज है और आज फिर मैं आपके सामने हाजिर हूं एक बेहतरीन कहानी लेकर उम्मीद है कि यह आपको पसंद आएगी। मेरी उम्र 28 साल है और दिखने में काफी सुंदर और शरीफ लगता हूं। मेरे लैंड का साइज भी 8 इंच है और इसकी मोटाई भी 2 से ढाई इंच के बीच है।

आइए आपको मैं कहानी के बारे में बताना शुरू करता हूं। बात दिसंबर महीने की है जब मुझे दिल्ली से मुंबई किसी काम के लिए जाना था। क्योंकि यह प्लान अचानक बना था इसलिए ट्रेन में टिकट वगैरा उपलब्ध नहीं थे और मुझे बस से जाना पड़ा। मैंने एसी स्लीपर बस में एक ऊपर वाली स्लीपर सीट बुक कर ली और जाने की तैयारियां करने लगा।

अगले दिन में शाम को 4:00 बजे जहां से बस से चलनी थी वहां पहुंच गया और जब बस आई तो मैं अपनी सीट पर जाकर लेट गया। स्लीपर बस मैं अक्सर ही 2 लोगों के केबिन बने होते हैं और उन्हें बंद करने के लिए स्लाइडिंग दरवाजा दिया गया होता है।मैंने तो एक से होती हुई थी और वह बगल वाली सीट किसी और की थी इसलिए मैं अपनी सीट पर लेट गया और बस दिल्ली से निकल पड़ी।

जब यह आगरा जाकर रुकी तो तेरी बगल वाली सीट जिन्होंने बुक की थी वह लेडी आई और अपनी सीट पर बैठ गई। ठंड बहुत थी तो उसने दरवाजा बंद कर लिया और कंबल ओढ़ कर बैठ गई। ठंड के कारण सभी लोग अपना अपना केबिन बंद करके चुप चाप से बैठे थे और बस गाड़ी अपने गंतव्य की तरफ बढ़ी जा रही थी।

वह आंटी करीबन 40-45 साल की थी और दिखने में एकदम गोरी चिट्टी थी और उन्होंने मोटी जाकेट पहन रखी थी इसलिए मैं उनके बूब्स देख नहीं पा रहा था। फिर उन्होंने मुझे कहा कि अरे बेटा ठंड लग रही है तो कंबल के अंदर बैठ जाओ और मैंने भी ऐसा ही किया और कंबल के अंदर बैठ गया। हम दोनों में बातें चालू हो गई और वह मुझे अपने बारे में बताने लगी और मैं अभी उन्हें अपने बारे में कुछ कुछ बातें बताने लगा।

फिर उन्होंने मुझसे पूछा क्या तुम्हारी शादी हो चुकी है। मैंने कहा नहीं आंटी अगले साल करनी है। 28 साल के हो गए लेकिन अभी तक शादी नहीं की मेरे तो 28 साल में दो बच्चे भी हो गए थे। मैंने आंटी को कुछ नहीं बोला और हल्का सा मुस्कुरा दिया। अब शाम के 8:00 बज चुके थे और अंधेरा भी हो गया था तो बस एक होटल पर रुके और सब लोगों ने अपना रात का खाना खाया। क्योंकि ठंडी में होटल बगैरा जल्दी बंद हो जाते हैं इसलिए बस 8:30 बजे तक रुकी ओर सभी लोगों के खाना कहने के बाद आगे की ओर बढ़ चली।

अब सभी लोग अपने-अपने केबिन दिन में सो गए थे और बस में एकदम से सन्नाटा पसर गया था। तभी अचानक से आंटी मैं अपना हाथ मेरे लन्ड पर रख दिया और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी। क्योंकि अब हम सोने वाले थे इसलिए हमने अपनी अपनी जैकेट उतार दी थी और अब मैं उनके बूब्स देख पा रहा था जो बाहर से बहुत ही बड़े लग रहे थे।

फिर आंटी ने कहा अच्छा लग रहा है क्या और भी करूं। मैंने हामी भर दी और आंटी ने मेरे जींस की जीप खोल कर मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी। उनके ठंडे हाथ जब मेरे गरम-गरम लंड को छुए तो मेरे शरीर में एक अजीब सी झनझनाहट हुई और मै उस आंटी से लिपट गया।

फिर मैंने धीरे से अपना हाथ आंटी के सलवार नीचे की तरफ से घुसाते हुए उनके बूब्स पर रख दिया और उन्हें अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगा। अब आंटी भी अपने होठों को अपने दांत से काट रही थी और मुझे इस बात की पुष्टि हो चुकी थी कि अब आंटी चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार है। मैंने कंबल के अंदर ही आंटी की प्लाजो को उनकी कमर से नीचे उतारा और उनकी पैंटी को भी नीचे कर दिया और उनकी झाटों से भरी चुत में उंगलियां करने लगा।

आंटी बंटी का शरीर अब मचलने लगा था और मैं आंटी के ऊपर आकर लेट गया था। फिर मैंने आंटी की सलवार को ऊपर उठाते हुए उनके गले तक पहुंचा दिया और उनकी ब्रा खोल कर उनके बूब्स के दर्शन किए। बड़े-बड़े दूध जैसे सफेद बूब्स और उनके ऊपर काले रंग की खुशियां देखकर मेरा मन गदगद हो गया और मैंने उनके बूब्स को चूसना शुरू कर दिया।

आंटी अब थोड़ी थोड़ी सिसकियां भर रही थी लेकिन मैंने अपने हाथ से उनके मुंह को बंद कर दिया और उनकी आवाज को दबा दिया। फिर अब मैंने अपना लंड आंटी की चुत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। एकदम जोरदार रफ्तार में चुदाई करने लगा। फंटी क्योंकि इन चीजों में काफी एक्सपीरियंस थी इसलिए वह भी मेरा साथ देने लगी और मुझे इस तरह की चुदाई का मजा पहले कभी नहीं मिला था।

क्योंकि बस चल रही थी और हिल भी रही थी इसलिए चुदाई का पता किसी को भी नहीं लग रहा था। मुझे आंटी बड़ी हॉट लगने लगी और मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखकर उन्हें किस करना शुरू कर दिया। अब आंटी का पानी निकलने वाला थी और मैं भी झड़ने ही वाला था तो मैंने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी और आंटी की उम्महह…. आह्हह…. जैसी आवाजें धीरे-धीरे निकालने लगी।

फिर आंटी झड़ गई और मैंने भी अपना सारा वीर्य आंटी की फूदी में ही निकाल दिया। और मैं बंटी के ऊपर लेट गया। जब थोड़ा आराम मिला तो मैं आंटी के ऊपर से हटकर बगल में लेट गया और बंटी ने अपनी सलवार और प्लाजो वगैरह ठीक किए। मैंने भी अपनी पैंट ऊपर की ओर आंटी को अपनी बाहों में भर कर लेट गया।

अब हम दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर लेटे हुए थे और बीच-बीच में मैं उन्हें किस्स करता और उनके बूब्स की गर्मी महसूस करता। वो भी मेरी पैंट की जिप खोलकर मेरे लन्ड को अपने हाथ में लेकर सहलाती और लंड की गर्मी को महसूस करती। इस तरह मेरा सफर बहुत ही शानदार तरीके से गुजरा।