ठरकी आंटी की चूत की गरमी को लंड के पानी से बुझाया

नई दिल्ली में जब एहतियातन लॉकडाउन शुरू हुआ, तब मुझे कॉलेज का हॉस्टल छोड़ना पड़ा था. मैं अपने घर फ़ौरन लौट नहीं सकता था. इसलिये मुझे शबाना आंटी के घर कुछ दिन रहना पड़ा.

मेरी शबाना आंटी एक विधवा है और उसकी कोई संतान नहीं है. उसका घर मेरे कॉलेज के हॉस्टल से थोड़ी दूरी पर है. जब मैंने आंटी को फ़ोन पर मामला बताया, तब उसने तुरंत घर आने को कहा था.

घर पहुंचने के बाद, मुझे पता चला कि वहां शबाना आंटी की सहेली शबनम भी उसके साथ रहती है. शबाना आंटी के मकान में सिर्फ़ एक कमरा है और उसने वहीं मेरे लिए भी जगह बनाकर रखी थी. शबनम आंटी भी मेरी तरह अपने घर तुरंत लौट नहीं सकती थी. इसलिये वह भी शबाना आंटी के घर ठहरी थी.

दोपहर का समय था, दोनों आंटी ज़मीन पर रजाई बिछाकर लेटी थीं. मैं रसोईघर में कुर्सी पर बैठे फ़िल्म देख रहा था. फ़िल्म में जब रोमांटिक दृश्य शुरू हुआ तो मेरा लंड टाइट हो गया.

मैंने बाहर के कमरे में झांककर देखा और दोनों आंटी को गहरी नींद में सोते हुए पाया. फिर, मोबाइल पर पोर्न वीडियो देखते हुए मैं हस्थमैथुन करने लगा. लंड का माल मैंने दीवार पर झड़ दिया और बाथरूम में चला गया.

लंड साफ़ करते समय, मैंने रस्सी पर तंगी एक लाल पैंटी देखी. पैंटी की साइज से मुझे पता चला कि वह शबनम आंटी की है. मैंने अपने लंड को उस पैंटी से साफ़ किया और बाहर चला आया.

कुर्सी पर बैठे मैं शबनम आंटी की करवट तो ताकने लगा. शबनम आंटी की चर्बीदार जिस्म मेरी ठरक को ललकार रही थी. वह दिखने में भी एकदम रसीली थी. मुझे बस किसी भी तरह से उसकी वासना को जगाना था.

शाम का नाश्ता करते समय, मैं शबनम आंटी के मोटे बूब्स को घूर रहा था. जब वह नाश्ता करके उठी, तब झुकते वक़्त मुझे उसके नंगे बूब्स के दर्शन मिल गये थे. उसकी मैक्सी का बटन खुला था और उसने मुझे ताड़ते हुए देख लिया.

रात को बिस्तर लगने के बाद, शबाना आंटी सोने चली गयी. मैं शबनम आंटी के साथ रसोईघर में बातें कर रहा था. खुलकर बातें करने पर उसका चरित्र सामने आने लगा था. उसे गरमी से परेशान होते देख मैंने मस्ती करने की सोची.

मैं: गरमी हो रही है तो आप भी मेरी तरह खुलकर क्यों नहीं बैठती?

शबनम: अरे मैंने तेरी तरह अंदर कुछ पहना नहीं है (शरमाते हुए) .

मैं: तो और भी अच्छा है… फिर तो आपको गरमी भी नहीं लगेगी.

शबनम: फिर तेरी गरमी बढ़ेगी उसका क्या?

मैं: तो आप उतार दीजिये मेरी गरमी… वैसे भी आपके गल्ले देखने के बाद ही मुझमें गरमी चढ़ी है…

शबनम आंटी मेरी चड्डी में तनकर खड़े लंड की तरफ़ देखने लगी. वह गरम हो चुकी थी और मुझे उस मौके को गवाना नहीं था.

मैंने शबनम आंटी का हाथ पकड़कर उसे खड़ा कर दिया. उसकी तेज़ चलती सांसे मुझे कट्टर चुदाई करने के लिए उकसा रही थी.

मैक्सी के अंदर हाथ घुसाकर मैंने उसकी कमर को दबोचा और उसे जकड़ लिया. आंटी की सिसकियां सुनने के बाद मेरी हिम्मत बढ़ गयी. उसकी चर्बीदार गांड़ को पकड़कर मैंने उसे मसलना शुरू किया.

शबनम आंटी की गांड़ पसीने से चिकनी हो गयी थी. मैं अपनी उंगली को उसकी गांड़ की छेद में घुसाकर उसे मस्त करने लगा. उत्तेजित होकर आंटी ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया.

आंटी की मैक्सी को उतारकर मैं उसके बूब्स चूसने लगा. हम एक दूसरे के पसीने से लथपथ शरीर को रगड़ रहे थे. मैं और आंटी दोनों फ़र्श पर बैठ गये. वह मेरी गोटियों को मुंह में भरकर चूसने लगी. थोड़ी देर बाद, मैंने आंटी की मोटी गांड़ को अपने चेहरे के उपर चढ़ाकर लेट गया.

उसकी गांड़ की छेद को फैलाकर मैंने अपनी ज़ुबान अंदर घुसा दी. दूसरी तरफ़ आंटी मेरे लंड को सहलाते हुए चूस रही थी. मैं उसकी झांट से भरी चूत को उंगलियों से फैलाकर रगड़ रहा था.

आंटी जोश में आकर तेज़ी से सिसकियां लेने लगी. वह अपनी भारी गांड़ को मेरे चेहरे पर दबाने लगी थी. पोजीशन बदलकर मैंने उसे ज़मीन पर लेटा दिया और उसके पैरों को अपने कंधो पर रख दिया.

मैं लंड की नोक को आंटी की चूत पर रखकर रगड़ने लगा. फिर धक्का मारकर मैंने लंड को चूत में घुसा दिया और आंटी के उपर चढ़ गया.

उसके मोटी बूब्स को दबोचकर मैं चूत चुदाई करने लगा. आंटी भी मूड में आकर मेरी गांड़ दबाने लगी थी. मेरा जोश बढ़ने लगा था इसलिये मैंने आंटी की टांगे उठाकर उसकी चूत को तेज़ी से चोदना शुरू किया.

कुछ देर बाद, मैं फ़र्श पर लेट गया और आंटी को अपने उपर चढ़ाकर लेटाया. मेरे लंड को पकड़कर आंटी ने उसे चूत में घुसा और उसे पूरा अंदर लेकर उसपर बैठ गयी.

शबनम आंटी मेरे लंड पर अपनी मोटी गांड़ को उछालने लगी. मैं उसके हिलते हुए बूब्स को पकड़कर दबाने लगा. जैसे ही आंटी की सिसकियों की आवाज़ बढ़ने लगी, मैंने उसके बूब्स को खींचकर उसे अपने बाहों में भर लिया.

उसकी चर्बीदार गांड़ को पकड़कर मैं लंड को चूत में तेज़ी से धकेलने लगा. शबनम आंटी की चूत चुदाई करते समय, शबाना आंटी रसोईघर में आ गयी.

शबाना: चलो आख़िर मिल ही गयी तेरी चूत को ठंडक. बाहर पंखे की हवा खाते चुदाई करते तुम दोनों…

शबनम: यहां पर ज़्यादा मज़ा आ रहा है. बाहर कल चुदाई कर लेंगी. तू सो जा. तुझे अब से परेशान नहीं करूंगा मैं.

शबाना आंटी के जाने के बाद, मैंने शबनम आंटी की चूत चुदाई फिर से शुरू कर दी. कुछ देर और चुदाई करने के बाद मेरे लंड का माल निकलने वाला था.

मैं: मेरे लंड का माल निकलने वाला है. आप उसे चूत में लेंगी की मुंह में?

शबनम: मेरी चूत को ठंडा कर दो जान. मुझे अब बच्चे नहीं होने वाले हैं…

मैंने ज़ोर-ज़ोर से लंड को शबनम आंटी की चूत में ठोकना शुरू किया. उसके चूतड़ दबोचकर मैंने पूरी ताकत से लंड के माल को अंदर झड़ दिया. चुदाई ख़तम हो जाने के बाद. हम दोनों साफ़ करने के बजाये बाहर जाकर साथ लेट गये.

शबनम: इसे सुख जाने दो. कल सुबह एक साथ साफ़ कर लुंगी.

मैंने शबनम आंटी को बाहों में भर लिया और हम दोनों एक दूसरे की गांड़ को पकड़कर मीठी नींद में खो गये.