अनजानी लड़की की चूत चुदाई

दोस्तों, मेरा नाम अंकुश हे और मैं आप सब के लिए एक स्टोरी लेकर आया हूँ, मेरी ये पहली स्टोरी हे. मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. और मेरी उम्र २९ साल, और मैं हिंदी टीचर हूँ. मुझे नए नए लोगो से जान पहचान बनाना पसंद हे. में सेक्स टॉपिक पर बहुत रूचि रखता हूँ. और हमेशा सेक्स के बारे में वेब पर पढता रहता हूँ. मैं नए नए तरीके सिख लेता हूँ. और औरतो को केसे खुश रखा जाए ये जान लेता हूँ. मुझे ज्यादा उम्र वाली औरते पसंद हे जेसे ३०-३५ साल की. तो चलो दोस्तों, मै अपनी कहानी बताने जा रहा हूँ.

एक दिन मैं सब्जी लेकर घर की और आ रहा था तो रास्ते में एक गाड़ी  मेरे पास आकर रुकी, उसमे दो लडकिया थी एक २० साल की उम्र की लग रही थी और दूसरी २६ साल की लग रही थी. गाड़ी रुकते ही मैंने गाड़ी के अन्दर देखा मेरे देखते ही वो औरत मुझसे सेक्टर १२ का पता पूछने लगी, दोस्तों मैं ये एड्रेस सुन कर मन ही मन पगला उठा क्युकी मैं खुद भी वही का रहने वाला हूँ. मैंने खुशी जाहिर किये बिना ही उन्हें बोला मैं वहीँ का रहने वाला हूँ अगर आप लोगो को कोई परेशानी ना हो तो आप के साथ ही गाडी में बेठा ले.

फिर दोस्तों उन्हें कोई परेशानी न होते मुझे उन्होंने गाड़ी में बेठा लिया. रास्ता करीब १० मिनट का था तो चुप-चुप कैसे बेठे रेहते रास्ते में हमने एक दुसरे का परिचय लिया और इसी दौरान पता चला की वो अपने चचेरे भाई के यहाँ शादी में आई थी. उस महिला का नाम आरोही था और वो छोटी लड़की का नाम सीमा. बातो बातो में यह भी बताया की वो दिल्ही पहली बार आई हे.

और फिर दोस्तों कम समय में हमने इतनी बाते की, की अनजानापन लगा ही नहीं और हमारी दोस्ती हो गयी. जैसे हम लोग कई सालो से एक दुसरे को जानते हे. दोस्ती का मेलाप होते ही हमने एक दुसरे को अपने अपने नंबर दिए. फिर सेक्टर १२ आ गया और में वही उतर गया मेरा घर उसके भाई के घर से ६ घर की दुरी पर था. में थैंक्स बोलकर चलता बना.

दो दिन की शादी निपटाने के बाद जब वो वापस जा रही थी तो उसने मुझे फोन पर कांटेक्ट किया. उस वक़्त तो जाने का समय हो गया था तो मिलना संभव नहीं था फिर मिलेंगे कह कर बात ख़तम की और फिर वो चली गयी. फिर दुसरे ही दिन जब में बिस्तर में था तभी उसका फोन आया इधर उधर की बाते की और उसने बताया की वो अकेली रहती हे उसके पति ने उसे छोड़ दिया हे और अब वो दूसरी शादी करना नहीं चाहती.

उस दिन के बाद थी चार दिन निकल गए में भी बेचैन तो था ही उससे बात करने के लिए उसी को याद कर रहा था की दोपहर उसका फोन आया उसे कुछ प्रॉब्लम थी तो मुझे बुलाया था मैने शाम ७ बजे स्कूल छुट ने के बाद आने को कहा. जब शाम को पहुंचा तो देखा वो मेरा इन्तेजार कर रही थी.

मैने जाते ही उसका चेहरा पढ़ लिया वो थोड़ी परेशान लग रही थी. मैने जब हाल पूछा तो उसकी आँखे भर आई और वो सीधे ही मुझे लिपट गयी और खूब रोई मैने भी उसे रो लेने दिया जब वो खुद ही चुप हुई तो मैने उसे अपने से जुदा करना चाहा तो वो बोली  मत करो अपने से अलग मुझे यु ही लिपटे रहने दो. जो में चाहती हूँ वो तुमसे पाने की उम्मीद रखती हूँ.

में भी कहाँ दोस्तों कम था में भी तो यही चाहता था जो आकर मिला था मुझे मै भी लिप्त रहा उसे.कुछ ५ मिनट तक हम युहीं एक दुसरे कु सहलाते रहे और फिर हुआ दोस्तों मेरा बेकाबू दीवानापन मैंने तो अपने होठो का जाम सीधे उसके होठो पर रख दिया और धीरे धीरे सुर्ख होठो का जाम चूसने लगा. वो भी तो मजे ले ले कर चूस रही थी.

कुछ देर तक हम किस करते रहे और फिर एक दुसरे को चुमते रहे. मैं जब उसके गोर बदन का रस पि रहा था तब वो कामना के आवेश में आ गयी और उह… आंमाह……ऊउह्ह्ह्ह… किये जा रही थी और उसकी ये सेक्सी आवाज मुझे और भी बेकाबू बना रही थी.

अब धीरे धीरे में उसकी छातियो तक आ गया और उसकी चुस्कियो को चूसने लगा वाह क्या स्वाद हे उसका मै तो जैसे जन्नत की सेर कर रहा था. अब में धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था वो भी पूरा सहयोग दे रही थी.मैने उसे पुरे कपडे उतार देने को कहा और अपने कपड़े उतारने लगा वो इतनी उत्साहित हो गयी थी की एक पल में ही बिना जिजक के कपडे उतर फेंके.अब हम दोनों पुरे न्यूड थे.

में लगातार उसे चूम रहा था वो भी मदहोश हुए जा रही थी.बेकाबू थी जैसे मुझसे पहले उसी को जल्दी हे चुदवाने की और था भी वैसा ही मुझे बहुत मजा आ रहा था उसकी बेताबी को देख कर.

हम एक दुसरे को चाट रहे थे चूम रहे थे में कभी चाटता तो कभी चूमता तो कभी बहुत आवेश में होती तो वो खुद ही बाईट करने को कहती दोस्तों क्या बताऊ क्या मजा था उसके साथ वो पहली शाम गुजरने का.

हम दोनों एक दुसरे को चूम रहे थे में उसकी दोनों छातियो को चूस रहा था और वो मेरे बालो को खीच खिंच कर मुझे और उत्साहित कर रही थी. वो बिच बिच में आआह्ह्ह…ऊउम्म… जेसे सेक्सी बोल लगा रही थी.वो भी कुछ कम नहीं थी कभी अपनी छुट मेरे मुह में देती चुसवाती तो कभी मेरा लैंड लेकर खुद ही चूसने लगती,  दोस्तों  में तो बहुत बहुत ही मजा ले रहा था और उसे भी मजा आ रहा था.हम दोनों अब एक दुसरे को चिपक गए थे और में अपना लंड उसकी छुट पर लगाने की झेहमत कर रहा था.

दोस्तों कुछ देर बाद मेरा लैंड एक दम टाइट हो गया और अब उसे रोक पाना मुस्किल था और वो भी कुछ कम नहीं थी दोस्तों मुझे काट काट रही थी और खुद ही मेरे लंड अंदर चूत में घुसा कर खुद ही छोड़ ने लगी.

कभी वो झटके लगाती कभी में लगता था. अब तो क्या मैने उसे उठने ही नहीं दिया और इतने झोर झोर से झटके लगाये की वो भी खुस खुस हो गयी और झोर झोर से चिल्लाने लगी चोद दाल और झोर से चोद उसकी यही आवाज सुनकर मेरा सब पानी उसके अन्दर ही निकल गया. और फिर हम दोनों पूरी रात नंगे ही एक दुसरे को चिप कर सोते रहे.